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Showing posts from November, 2021

हम ख़ुदा के एहसानो के कर्ज़दार हैं , हर सांस , हर धड़कन के लिए| हम कर्ज़दार हैं , इस ख़ूबसूरत ज़िन्दगी के लिए , जिसे वो अपने पवित्र हांथों में सुरक्षित रखता है| हम कर्ज़दार हैं , इस ख़ूबसूरत सृष्टि के लिए ; परिंदों , तितलियों , गुनगुन करते भवरों के लिए| कभी आपने , अपने दिल की धड़कन सुनी है? एक ख़ूबसूरत संगीत , आपके सीने में छुपा है|ख़ुदा के एहसानो का क़र्ज़ चुकाना , हमारे लिए नामुमकिन है| वो आपसे धन दौलत नहीं चाहता , न उसे आपकी दौलत की आरज़ू है| ख़ुदा बस इतना चाहता है , आप उसके पास लौट आयें| कितने ही ऐसे हैं जो चंगाई पाने के बाद , दुनियां में वापस लौट जाते है| अगर आत्मिक चंगाई हासिल ना हो , तो शारीरिक चंगाई बेकार है| आपका आज , और आपका कल , आपका नहीं है| वो आपके परमेश्वर की देन है,उसका उसे दे कर देखिए वो आपको शिरोमणि बना देगा।

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हम ख़ुदा के एहसानो के कर्ज़दार हैं , हर सांस , हर धड़कन के लिए| हम कर्ज़दार हैं , इस ख़ूबसूरत ज़िन्दगी के लिए , जिसे वो अपने पवित्र हांथों में  सुरक्षित  रखता है| हम कर्ज़दार हैं , इस ख़ूबसूरत सृष्टि के लिए ; परिंदों , तितलियों , गुनगुन करते भवरों के लिए| कभी आपने , अपने दिल की धड़कन सुनी है? एक ख़ूबसूरत संगीत , आपके सीने में छुपा है|ख़ुदा के एहसानो का क़र्ज़ चुकाना , हमारे लिए नामुमकिन है| वो आपसे धन दौलत नहीं चाहता , न उसे आपकी दौलत की आरज़ू है| ख़ुदा बस इतना चाहता है , आप उसके पास लौट आयें| ख़ुदा ने हिजकियाह की ज़िन्दगी में , पंद्रह साल और जोड़ दिए ।  2 इतिहास 32=25 के अनुसार :-हिजकियाह ने उस उपकार का बदला ना दिया| दस कोढ़ियों में से सिर्फ दो ही वापस लौट कर आये| येशू ने पूछा , क्या बाकि चंगे नहीं हुए? कितने ही ऐसे हैं जो चंगाई पाने के बाद , दुनियां में वापस लौट जाते है|  अगर आत्मिक चंगाई हासिल ना हो , तो शारीरिक चंगाई बेकार है| हिजकियाह को मिले पंद्रह साल , उधार की ज़िन्दगी थी| उसे ख़ुदा के लिए जीना था , और ख़ुदा के लिए मरना था| आपका आज , और आपका कल , आपका नहीं है| वो आपके परमेश्वर की ...

कुछ लोग सोचते हैं चलो किसी के साथ विश्वासघात घात कर लो किसी के भी भरोसे को तोड दो कौन पूछनेवाला है इस तरह की सोच लिये आज के समाज में व्यक्ति चलते हैं । बाइबिल कहती है हाय तुझ नाश करनेवाले पर जो नाश नहीं किया गया था ; हाय तुझ विश्वासघाती पर जिसके साथ विश्वासघात नहीं किया गया । जब तू नाश कर चुके , तब तू नाश किया जाएगा ; और जब तू विश्वासघात कर चुके तब तेरे साथ विश्वासघात किया जाएगा ।इन्सान जब सबका बुरा कर चुका होता है और शान्ति चाहता है सब बातों से बैखबर होता है तब उसके साथ वो किया जाता है जो उसने किसी दूसरे के साथ किया होता है कोई दूसरा भी उसके साथ ठीक वैसा ही करता है तब उसको इस बात का अहसास होता है जो मैं ने किसी के साथ किया वही आज मेरे साथ भी हो गया जो आप दूसरों को दोगे वही आपको भी दिया जाएगा जैसा आप किसी के साथ करोगे वैसा ही तुम्हारे साथ भी किया जाएगा और वो भी तब जब तुम एक खुशहाल जीवन जी रहे होगे जब तुम्हें लगेगा अब तो सब ठीक हो गया पर अचानक ही आपके साथ वो हो जाएगा जिसकी आपने कलपना भी नहीं की होगी ।इसीलिये अगर आप चाहते हैं कि आप का बुरा न हो आप भी किसी का बुरा न करें और अच्छा करें तो आपके साथ भी अच्छा होगा ।

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कुछ लोग सोचते हैं चलो किसी के साथ विश्वासघात घात कर लो किसी के भी भरोसे को तोड दो कौन पूछनेवाला है इस तरह की सोच लिये आज के समाज में व्यक्ति चलते हैं । उनका मानना होता है हम अपना काम सीधा करें बाकी सब जाए खड्डे में हमें कया पडी है और वो किसी के भी भरोसे को तोडने से भी पीछे नहीं हटते चाहे सामनेवाला उनको कितना ही प्यार क्यों न करता हो , कितना ही विश्वास क्यों न करता हो इस बात से उनको कोई फर्क नहीं पडता लोग अपने को ऊपर लाने की खातिर दूसरों का इस्तेमाल करते हैं , अपने लिये आकाश तलाशने की खातिर दूसरों के जीवन में अन्धकार करने से भी पीछे नहीं हटते वो ऐसा करके अपने को कामयाब तो कर लेते हैं पर नहीं जानते इस बात का अन्जाम क्या होगा इस बात का उनके आनेवाले जीवन में क्या परिणाम होगा ?  बाइबिल कहती है हाय तुझ नाश करनेवाले पर जो नाश नहीं किया गया था ; हाय तुझ विश्वासघाती पर जिसके साथ विश्वासघात नहीं किया गया । जब तू नाश कर चुके , तब तू नाश किया जाएगा ; और जब तू विश्वासघात कर चुके तब तेरे साथ विश्वासघात किया जाएगा । इन्सान जब सबका बुरा कर चुका होता है और शान्ति चाहता है सब बातों से बै...

तू भूमि की सुधि लेकर उसको सींचता है , तू उसको बहुत फलदायक करता है ; परमेश्वर की नदी जल से भरी रहती है ; तू पृथ्वी को तैयार करके मनुष्यों के लिये अन्न को तैयार करता है । इस अन्न को पैदा करने की खातिर परमेश्वर ने कितनी मेहनत की किसान ने अपना खून पसीना बहाया यह हमें पता नहीं लगता हम तो बस दुकान पर जाकर सामान खरीद लाते पर उस सामान को बनानेवाले की मेहनत को भूल जाते और कहते फिरते हमने इसे खरीदा है किसी को भी उसके पीछे की मेहनत नजर नहीं आती परमेश्वर ने जो रचना की है वो नदियों के जल को भाप बनाकर बादलों पर रखता है और समय समय पर मनुष्यों के लिए मेह बरसाता है , तब जाकर धरती की प्यास बुझती है | परमेश्वर कितना महान है उसने हमें यूँ ही नहीं छोडा उसने समय समय पर हमारे लिये हर फल का , फूल का इन्तजाम किया ताकि मनुष्य को किसी भी तरह की तकलीफ न हो उसने हमारी हर छोटी से छोटी जरूरत का ध्यान रखा ताकि हमें किसी भी तरह की कठिनाई का सामना न करना पडे पर मनुष्य ने अपने लाभ की खातिर सब कुछ बिगाड दिया मगर परमेश्वर फिर भी हमारा ध्यान रखता है कितना भला है हमारा परमेश्वर । परमेश्वर का धन्यवाद करो , क्योंकि वो भला है , उसकी करुँणा सदा की है ।

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तू भूमि की सुधि लेकर उसको सींचता है , तू उसको बहुत फलदायक करता है ; परमेश्वर की नदी जल से भरी रहती है ; तू पृथ्वी को तैयार करके मनुष्यों के लिये अन्न को तैयार करता है । यह है उस खाने की सच्चाई जो हर रोज तीनों समय हमारी मेज पर होता है ; जिसे बहुत से लोग खाते तो कंम हैं पर बर्बाद ज्यादा करते हैं ? यह उन्हेँ मालूम नहीं होता उस खाने को उगाने के लिये परमेश्वर ने अपने स्वर्ग से अपने पवित्र जल को बरसाया और तब जाकर जमीन तैयार हुई और फिर जाकर किसान ने उसमें हल चलाकर धरती का सीना चीर कर अन्न उगाया तब जाकर वो अन्न हमारी मेज तक पहुँचा और उसे खाया कम बर्बाद ज्यादा किया ?  इस अन्न को पैदा करने की खातिर परमेश्वर ने कितनी मेहनत की किसान ने अपना खून पसीना बहाया यह हमें पता नहीं लगता हम तो बस दुकान पर जाकर सामान खरीद लाते पर उस सामान को बनानेवाले की मेहनत को भूल जाते और कहते फिरते हमने इसे खरीदा है किसी को भी उसके पीछे की मेहनत नजर नहीं आती परमेश्वर ने जो रचना की है वो नदियों के जल को भाप बनाकर बादलों पर रखता है और समय समय पर मनुष्यों के लिए मेह बरसाता है , तब जाकर धरती की प्यास बुझती है...

बाइबिल का यह वचन हमें इस बात की ओर इशारा करता है हम मनुष्य परमेश्वर को अपनी अच्छाइयों के द्बारा प्रसन्ना नहीं कर सकते ? वो तो बस इतना चाहता है हम उसके भय को समझे , और उस भय में रहकर ही अपने प्रेम को दूसरों को भी दिखाते रहें , खुद प्रेम से रहें , दूसरों को भी प्रभु के प्रेम मे चलना सिखाएँ , बाइबिल हमें प्रेम करना ही सिखाती है | क्योंकि यीशु मसीह ने अपनी जान सबके लिये दी , बाइबिल कहती है , परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि अपना इकलौता बेटा भी दे दिया , यह इस बात का सबूत है परमेश्वर हमसे कितना प्रेम करता है , न कि किसी एक व्यक्ति , या किसी एक जाति से हम सब उसकी बैहतरीन रचना है ; उसने हमें अपने हाथों से रचा हमारे नथूनों में जीवन का शवास फूंका ताकि हम उसके जैसे हो जाएँ वो हमसे बहुत प्रेम करता है हमें भी इसी प्रकार एक दूसरे से प्रेम रखना सीखना होगा इससे ही हम परमेश्वर के सच्चे और अच्छे बच्चों में शामिल हो सकेंगे और उसकी सन्तान कहलाएँगे ।

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बाइबिल का यह वचन हमें इस बात की ओर इशारा करता है हम मनुष्य परमेश्वर को अपनी अच्छाइयों के द्बारा प्रसन्ना नहीं कर सकते ?  कुछ लोगों का मानना है हमारे अच्छे काम़ो के द्बारा हम परमेश्वर को प्राप्त कर सकते हैं , उद्बार पा सकते हैं , बलिदान चडाकर परमेश्वर को खुश कर सकते हैं ; जो कि परमेश्वर नहीं चाहता । वो तो बस इतना चाहता है हम उसके भय को समझे , और उस भय में रहकर ही अपने प्रेम को दूसरों को भी दिखाते रहें , खुद प्रेम से रहें , दूसरों को भी प्रभु के प्रेम मे चलना सिखाएँ , बाइबिल हमें प्रेम करना ही सिखाती है , क्योंकि चाहे हम स्वर्ग दूतों की बौलियाँ भी बोलें और प्रेम न रखें तो हम ठनठनाता हुआ पीतल और झनझनाती हुई झाँझ ठहरेंगे । हमें दिखावे कि जिन्दगी से दूर रहकर सच्चाई से एक दूसरे से प्रेम रखना होगा , परमेश्वर इसी से खुश होगा ;  हर उस व्यक्ति से जो इस संसार में रहता है । क्योंकि यीशु मसीह ने अपनी जान सबके लिये दी ,  बाइबिल कहती है , परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि अपना इकलौता बेटा भी दे दिया , यह इस बात का सबूत है परमेश्वर हमसे कितना प्रेम करता है , न कि किसी एक व...

यीशु मसीह ने जब अपनी भेडों को सम्भाला तो उन्हें अच्छे से तैयार किया सब कुछ उन्हे सिखाया ; जीवन के गूढ रहस्यों की बातों को दृष्टान्तो मे समझाया यह एक परमेश्वर ही कर सकता है जो उसने किया भी ; और यह सब काम यीशु मसीह के द्वारा किये,उसने खोई हुई भेडों को ढूँढा , और जो लोग अन्धेरे में थे उन्हे रोशनी दी , और जो बिमार ओर घायल थै उन्हे चंगा किया व उनको बलवान बनाकर लोगों के सामने मिसाल पैश की यही करने वो आया था जितनी कलीसियाओं के लोग हैं वो उसी के हैं चाहे पासवान (Pastor) कितना ही कहें यह मेरी भेडें हैं , पर वो सिर्फ यीशु मसीह की भेडें हैं जो भी उन्हे अपनी भेड कहकर हक जताता है वो भ्रम में जी रहा है उसका कुछ भी नहीं सब यीशु मसीह का है, पासवान (Pastor) का काम है उन्हें एक जगह लाकर पवित्रात्मा की सहायता से उन्हे सिखाने का अधिकार रखता है यही उसका काम है यही करना भी चाहिए इससे अधिक नहीं इससे अधिक जो होता है वो लालच को जन्म देता है जो कि सही नहीं है ; जो परमेश्वर का है वो परमेश्वर का ही रहेगा वो अपना ले लेगा इसलिये जो सही है, वही परमेश्वर के हाथों में है।

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यूह 10 ; 11 - अच्छा चरवाहा मैं हूँ ; अच्छा चरवाहा भेडों के लिए अपनी जान देता है । 12 - मजदूर जो न चरवाहा है और न भेडों का मालिक है , भेडिये को आते देख भेडों को छोडकर भाग जाता है ; और भेडिया उन्हें पकडता और तितर बितर कर देता है । यीशु मसीह ने जब अपनी भेडों को सम्भाला तो उन्हें अच्छे से तैयार किया सब कुछ उन्हे सिखाया ; जीवन के गूढ रहस्यों की बातों को दृष्टान्तो मे समझाया यह एक परमेश्वर ही कर सकता है जो उसने किया भी ;  और यह सब काम यीशु मसीह के द्वारा किये,उसने खोई हुई भेडों को ढूँढा , और जो लोग अन्धेरे में थे उन्हे रोशनी दी , और जो बिमार ओर घायल थै उन्हे चंगा किया व उनको बलवान बनाकर लोगों के सामने मिसाल पैश की यही करने वो आया था जितनी कलीसियाओं के लोग हैं वो उसी के हैं चाहे पासवान (Pastor) कितना ही कहें यह मेरी भेडें हैं , पर वो सिर्फ यीशु मसीह की भेडें हैं जो भी उन्हे अपनी भेड कहकर हक जताता है वो भ्रम में जी रहा है उसका कुछ भी नहीं सब यीशु मसीह का है, पासवान (Pastor) का काम है उन्हें एक जगह लाकर पवित्रात्मा की सहायता से उन्हे सिखाने का अधिकार रखता है यही उसका काम है यही ...

जब भी हम इस संसार में भटकने लगते हैं तब तब परमेश्वर हमें आवाज लगा कर वापस बुलाता है वह एक नहीं दो बार बौलता है मगर हम परमेश्वर की इस वाणी को सुनकर अनसुना करते या फिर सुन ही नहीं पाते हैं ।क्योंकि हम अपने मनों को इतना कठोर कर चुके होते हैं कि हम बचना ही नही चाहते उस आग की ओर बडते जाते हैं जो हमें पल पल जलाने के लिये तैयार है । परमेश्वर की आवाज सुनों तो अपने मनों को कठोर न करना ।

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जब भी हम इस संसार में भटकने लगते हैं तब तब परमेश्वर हमें आवाज लगा कर वापस बुलाता है वह एक नहीं दो बार बौलता है मगर हम परमेश्वर की इस वाणी को सुनकर अनसुना करते या फिर सुन ही नहीं पाते हैं । क्योंकि हम अपने मनों को इतना कठोर कर चुके होते हैं कि हम बचना ही नही चाहते उस आग की ओर बडते जाते हैं जो हमें पल पल जलाने के लिये तैयार है । जब जब इस्राएली परमेश्वर को त्याग देते व दूसरे देवताओं के पीछे हो लेते थे तब तब परमेश्वर उनके पास भविष्यव्कता को भेजता था ताकि वो उसकी सुने व बचा लिए जाएँ कुछ लोग तो सुनते थे पर कुछ उनका मजाक उडाते थे ।मगर परमेश्वर उनके लिये हमेशा अच्छा ही सोचता था आज भी वैसा ही हो रहा है लोग जब परेशान होते हैं तब तो परमेश्वर के पास आकर प्रार्थना करते हैं जब ठीक हो जाते तब वो अपनी पुरानी जिन्दगी में वापस लौट जाते हैं जो पापों से भरपूर होती है जिसका मुँह अधोलोक के फाटक के पास है । वे काठ से कहते हैं , तू मेरा बाप है , और पत्थर से कहते हैं , तू ने मुझे जन्म दिया है उन्होंने मेरी ओर मुँह नहीं पीठ ही फेरी है ; परन्तु विपत्ति के समय वे कहते हैं , उठकर हमें बचा । ऐसा कैसे हो...

जिन के द्वारा उस ने हमें बहुमूल्य और बहुत ही बड़ी प्रतिज्ञाएं दी हैं: ताकि इन के द्वारा तुम उस सड़ाहट से छूट कर जो संसार में बुरी अभिलाषाओं से होती है, ईश्वरीय स्वभाव के सहभागी हो जाओ।और इसी कारण तुम सब प्रकार का यत्न करके, अपने विश्वास पर सद्गुण, और सद्गुण पर समझ और समझ पर संयम, और संयम पर धीरज, और धीरज पर भक्ति और भक्ति पर भाईचारे की प्रीति, और भाईचारे की प्रीति पर प्रेम बढ़ाते जाओ।

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परमेश्वर के और हमारे प्रभु यीशु की पहचान के द्वारा अनुग्रह और शान्ति तुम में बहुतायत से बढ़ती जाए। क्योंकि उसके ईश्वरीय सामर्थ ने सब कुछ जो जीवन और भक्ति से सम्बन्ध रखता है, हमें उसी की पहचान के द्वारा दिया है, जिस ने हमें अपनी ही महिमा और सद्गुण के अनुसार बुलाया है। जिन के द्वारा उस ने हमें बहुमूल्य और बहुत ही बड़ी प्रतिज्ञाएं दी हैं: ताकि इन के द्वारा तुम उस सड़ाहट से छूट कर जो संसार में बुरी अभिलाषाओं से होती है, ईश्वरीय स्वभाव के सहभागी हो जाओ।और इसी कारण तुम सब प्रकार का यत्न करके, अपने विश्वास पर सद्गुण, और सद्गुण पर समझ और समझ पर संयम, और संयम पर धीरज, और धीरज पर भक्ति और भक्ति पर भाईचारे की प्रीति, और भाईचारे की प्रीति पर प्रेम बढ़ाते जाओ। आमीन प्रभु आपको और आपके परिवार को आशीष दे रैव्ह राजेश गिरधर

हमें बचाने की खातिर जो कि एक निर्बल व्यक्ति है उसने हमारे पापों को अपने ऊपर लेकर वो क्रूस की मृत्यु भी सह ली ताकि हमें अनन्त जीवन प्राप्त हो जाए , हम बचाए जाएँ यही कारण वो मारा गया , गाडा गया , और तीसरे दिन जिन्दा हो गया और दौबारा आनेवाला है यही है सच्चाई । जिसे आज लोग समझ नहीं पा रहे और यीशु मसीह के पीछे चलने से इनकार करते हैं जबकि हमें उसकी सलीब पर देखते हुए अपने को उसे समर्पण करना चाहिए इस महान काम के लिये जो उसने हमारे लिये किया धन्यवाद यीशु मसीह मेरे जैसे निर्बल और पापी के लिये आपने जान दी यह मैं सदा याद करता हुआ आपके पीछे चलता रहूँगा ताकि आपके पास आ सकूँ।

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कोई किसी बलवान व्यक्ति के लिये मरे , या कोई किसी बडे व्यक्ति के लिये मरे जैसा कि हम देखते हैं कुछ लोग अपने नेता के लिये अपनी जान दे देते हैं यह सही है या गलत यह तो उस व्यक्ति पर निर्भर करता है । पर इस संसार में कोई किसी निर्बल के लिये मरे यह हो नहीं सकता अगर कोई हमसे कहे यह जो सडक पर मजदूर काम कर रहे हैं इनके लिये मरो , या कहे कि जो यह गरीब सडक पर भिखारी बैठें हैं इनके लिये मरो , या कोई कहे कि जो अस्पतालों में मरीज पडे हैं उनके लिये मरो तो क्या हम मरेंगे ?  सीधा सा जवाब होगा हम क्यों इनके लिये अपनी जान दें यह तो यू ही पैदा हुए मर जाएँगे मगर हमें तो अपनी जान प्यारी है हम क्यों अपनी जान दें यह बात सौ में से सौ लोगों के मन में आएगी ?  पर मेरे यीशु मसीह के मन में यह बात नहीं आई क्यों ? क्योंकि वो हमसे प्रेम करता है वो जानता है हमारा मरने के बाद क्या होनेवाला है वो जानता है उस अधोलोक की आग मे क्या होता है जहाँ का कीडा कभी मरता नहीं , जहाँ की आग कभी बुझती नहीं वो यह जानता है वहाँ पर जाकर मानव का हाल क्या होनेवाला है यही कारण वो हमकों उस अधोलोक की आग से बचाना चाहता है हमे...

इंसान की ज़िंदगी में परमेश्वर को वो एहमियत नहीं मिलती है, जिसका की परमेश्वर हक़दार है, जबकि ज़िन्दगी उसी की देन हैं,दुआओं के ना सुने जाने की, यह भी एक बड़ी वज़ह हो सकती है। क्या हम पूर्ण रूप से परमेश्वर के वचन को मान्यता देते हैं, क्या वो हमारे लिए सबसे पहला स्थान है। बत्ती के चले जाने के बाद ही, मोमबत्ती की याद आती है; मगर हम परमेश्वर के वचन के साथ ऐसा नहीं कर सकते ज़रा सोचिए अगर दुनियां में परेशानियां, बीमारियां, नाकामयाबियां, और मृत्यु नहीं होती, तो क्या इंसान को परमेश्वर की या उसके वचन की ज़रूरत होती? शायद नही? जिस जीवित वचन से हमें सहारा मिलता हैं। उसी वचन की हमारे जीवन में कोई प्राथमिकता नही हैं। आज इंसान इतना व्यस्त यानी बिजी है, कि परमेश्वर के वचन को पढ़ने का भी उसके पास वक़्त नहीं है? मति 4-4 के अनुसार:- इन्सान केवल रोटी से नही परमेश्वर के हर एक वचन से जीवित रहेगा। जो आत्मा की रोटी हैं, उसे अपने जीवन से दूर कर देते हैं। यीशु ने कहा तुम जीवन पाने के लिए मेरे पास आना नही चाहते।भजन संहिता 119:105, में लिखा हैं:- तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है।इसी वचन से हम दूर भागते हैं। इसे पढ़ना नही चाहते इसे सुनना नही चाहते हमेशा की ज़िंदगी तो तब हमें मिलेगी जब परमेश्वर का वचन हमारी ज़िन्दगी में सबसे पहले स्थान पर होगा।

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इंसान की ज़िंदगी में परमेश्वर को वो एहमियत नहीं मिलती है, जिसका की परमेश्वर हक़दार है, जबकि ज़िन्दगी उसी की देन हैं, दुआओं के ना सुने जाने की, यह भी एक बड़ी वज़ह हो सकती है। क्या हम पूर्ण रूप से परमेश्वर के वचन को मान्यता देते हैं, क्या वो हमारे लिए सबसे पहला स्थान है।   वो अल्फ़ा और ओमेगा है, वो ही आदि और अन्त है,  प्रकाशितवाक्य 21:6, में लिखा हैं :- मैं अलफा और ओमेगा, आदि और अन्त हूं: मैं प्यासे को जीवन के जल के सोते में से सेंतमेंत पिलाऊंगा। इसका मतलब यह ही नहीं है कि वो पहला और आखरी है ; इसका मतलब है, वो ही सबसे पहले था और तब से लेकर आख़िर तक वही सब कुछ है। बत्ती के चले जाने के बाद ही, मोमबत्ती की याद आती है; मगर हम परमेश्वर के वचन के साथ ऐसा नहीं कर सकते ज़रा सोचिए अगर दुनियां में परेशानियां, बीमारियां, नाकामयाबियां, और मृत्यु नहीं होती, तो क्या इंसान को परमेश्वर की या उसके वचन की ज़रूरत होती? शायद नही? जिस जीवित वचन से हमें सहारा मिलता हैं। उसी वचन की हमारे जीवन में कोई प्राथमिकता नही हैं। आज इंसान इतना व्यस्त यानी बिजी है, कि परमेश्वर के वचन को पढ़ने का भी उसके पास वक़...

धर्मी को अधर्मी द्बारा रखे धन का हिस्सा मिलता है यह एक सच्चाई है जो बाइबिल पुराने नियम से ही हमको समझाती आ रही है ।नया नियम भी यही कहता है नाशवान भोजन के लिये मेहनत न करो , और न ही संसारिक वस्तुओं के पीछे भागो परन्तु स्वर्ग राज्य की खोज करो यह सब तो तुम्हें यूँ ही मिल जाएगा | आज भी परमेश्वर बदला नहीं है वो हमें भी सब कुछ बहुतायत से दे सकता है | इस बात से हम इनकार नहीं कर सकते परमेश्वर न्यायी है वो न्याय करता और धर्मी को और खरे मनुष्य को और जो उसकी खोज में रहता है उसे सब कुछ दे देता है यह सच्चाई है जिस चीज के लिये हमने मैहनत नहीं की होती वो भी हमारी झोली में आ जाती है यही है उसका न्याय बस विश्वास करो प्रार्थना करो और अपना काम करते रहो सबकुछ मिल जाएगा

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धर्मी को अधर्मी द्बारा रखे धन का हिस्सा मिलता है यह एक सच्चाई है जो बाइबिल पुराने नियम से ही हमको समझाती आ रही है । नया नियम भी यही कहता है नाशवान भोजन के लिये मेहनत न करो , और न ही संसारिक वस्तुओं के पीछे भागो परन्तु स्वर्ग राज्य की खोज करो यह सब तो तुम्हें यूँ ही मिल जाएगा   ; और मिला भी पुराना नियम जब पढते हैं तो हम पाते हैं किस प्रकार चालीस सालों तक परमेश्वर ने इस्राएली लोगों को स्वर्ग की रोटी दी , हर रोज उनके डेरे के बाहर मन्ना गिरता था जिसे वो हर रोज बटोरते व अपने लिये रोटी बनाते थे जिसकी कोई कीमत उन्होंने नहीं दी थी ; परमेश्वर मुफ्त खिलाता था । और लडाईयों के वक्त उन्हे लडना नहीं पडता था परमेश्वर आप उनकी ओर से लडता और वो जाकर सारा सोना , चान्दी बटोर कर ले आते थे।   आज भी परमेश्वर बदला नहीं है वो हमें भी सब कुछ बहुतायत से दे सकता है वजह आज भी बहुत से लोग हैं जो अधर्म से कमाते हैं , दूसरों से छीन लेते हैं , दूसरों का हक मार लेते हैं , जादू टोना करके लोगों की जमीन जायदाद अपनी कर लेते हैं , मगर उसका उपयोग नहीं कर पाते वो सब कुछ दूसरों के लिये छोडकर इस दुनिया...

हम सबका हर पल ,हर क्षण और हर समय यह अंगिकार होना चाहिए कि यीशु ने मेरे लिए स्वर्ग में एक ऐसा स्थान तैयार किया है जो मेरी आँखों ने कभी नहीं देखा है. और मेरी कल्पना कभी भी कल्पना नहीं कर सकती। वह सर्वशक्तिमान, सदा उपस्थित और सब कुछ जानने वाला परमेश्वर है। वह मेरी हर स्थिति को देखता है, जानता है और समझता है। वह हर समय मेरे साथ हैं। वह मुझे अपने दाहिने हाथ से सम्हालता है। वह मुझे कभी नहीं छोड़ेगा और न ही त्यागेगा। वह अपनी महिमा के धन के अनुसार मेरी सब आवश्यकताओं की पूर्ति करेगा। वह यीशु मसीह ही है जो मुझ में रहता है, मेरा हर समय और हर परिस्थितियों में साथ देता है।!

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हम सबका हर पल ,हर क्षण और हर समय यह अंगिकार होना चाहिए कि यीशु ने मेरे लिए स्वर्ग में एक ऐसा स्थान तैयार किया है जो मेरी आँखों ने कभी नहीं देखा है. और मेरी कल्पना कभी भी कल्पना नहीं कर सकती। वह चाँदी और सोना,  हजारों हजार पहाड़ियों पर मवेशियों का मालिक है। पृथ्वी उसी की है। उसने सभी चीजों को बनाया है जो मौजूद हैं। उसके लिए मेरी ज़रूरतों को पूरा करना बिल्कुल भी कठिन नहीं है चाहे वह पैसा हो या रहने का स्थान या और कुछ वह सर्वशक्तिमान, सदा उपस्थित और सब कुछ जानने वाला परमेश्वर है। वह मेरी हर स्थिति को देखता है, जानता है और समझता है। वह हर समय मेरे साथ हैं। वह मुझे अपने दाहिने हाथ से सम्हालता है। वह मुझे कभी नहीं छोड़ेगा और न ही त्यागेगा। वह अपनी महिमा के धन के अनुसार मेरी सब आवश्यकताओं की पूर्ति करेगा। वह यीशु मसीह ही है जो मुझ में रहता है, मेरा हर समय और हर परिस्थितियों में साथ देता है।! आमीन इस वचन के द्वारा परमेश्वर आपको आशीष और बरकत दे रैव्ह राजेश गिरधर

परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञान वालों को लज्ज़ित करे; और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्ज़ित करे। जब परमेश्वर हमें अपने कार्यों के लिए चुनते हैं तो हम जान जाते हैं कि परमेश्वर ने हमें इसलिए नही चुना की हम अच्छे हैं या हम योग्य हैं। बल्कि इसलिए किवचन कहता है कि उसने जगत के मूर्खों को चुन लिया। ऐसा इसलिए किया ताकि लोग इस बात को जाने की कार्य करने वाला परमेश्वर ही है। लेकिन हम चाहे कितने भी समझदार, बलवान, ज्ञानवान क्यों न हों लेकिन यदि हमारे साथ परमेश्वर नही; तो सब कुछ बेकार है।जिसके साथ परमेश्वर है वह कमजोर होकर भी ताकतवर है, निर्बल होकर बलवान है, मूर्ख होकर भी ज्ञान वान है। जो अपने ज्ञान और अपने बल पर घमंड करता है वह अपने जीवन को खराब कर रहा है। इसलिए परमेश्वर के राज्य में मूर्ख रहना ही अच्छा है।और जिसे कुछ भी नही आता परमेश्वर उसके द्वारा भी कार्य कर सकता है क्योंकि काम करने वाला परमेश्वर ही है, हम नही।

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परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञान वालों को लज्ज़ित करे; और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्ज़ित करे। और परमेश्वर ने जगत के नीचों और तुच्छों को, वरन जो हैं भी नहीं उन को भी चुन लिया, कि उन्हें जो हैं, व्यर्थ ठहराए।  (कुरिन्थियों 1:27-28) जब परमेश्वर हमें अपने कार्यों के लिए चुनते हैं तो हम जान जाते हैं कि परमेश्वर ने हमें इसलिए नही चुना की हम अच्छे हैं या हम योग्य हैं। बल्कि इसलिए कि वचन कहता है कि उसने जगत के मूर्खों को चुन लिया। ऐसा इसलिए किया ताकि लोग इस बात को जाने की कार्य करने वाला परमेश्वर ही है। कई लोग अकसर ऐसा सोच रखते हैं कि हमारे द्वारा है हम अच्छे से हैं, हमें परमेश्वर की जरूरत नही है और हम सब कुछ कर लेंगे। लेकिन हम चाहे कितने भी समझदार, बलवान, ज्ञानवान क्यों न हों लेकिन यदि हमारे साथ परमेश्वर नही; तो सब कुछ बेकार है। जिसके साथ परमेश्वर है वह कमजोर होकर भी ताकतवर है, निर्बल होकर बलवान है, मूर्ख होकर भी ज्ञान वान है। कई लोग तो परमेश्वर के दासों को तुच्छ समझकर संगति  ही छोड़ कर चले जाते हैं उन्हें लगता है हम बह...

"धन्य वे हैं जिन्हों ने बिना देखे विश्वास किया॥ शद्रक , मेशक , अबेदनगो को हम सब जानते है...परमेश्वर ने उन तीनों को धधकते हुए आग केे भट्ठे में जलने से बचाता है lऔर शद्रक , मेशक और अबेदनगो के इस विश्वास को सच्चा विश्वास कहते है...l उसी प्रकार हमारा भी विश्वास होना चाहिये...चाहे कोई भी समस्या हो , अगर हमे विश्वास है तो परमेश्वर हमें हमारी समस्याओ से आजाद करेगा l और फिर देखिये परमेश्वर आपके जीवन में अदभुत काम करना शुरू करेगा जो आप सोच भी नहीं सकते...lऔर अंत में , आपकी परिस्थिति जैसा भी हो , आप अपने विश्वास को कभी भी कमजोर होने मत दीजियेगा क्योंकी वचन कहता है - "...धर्मी अपने विश्वास के द्वारा जीवित रहेगा। (हबक्कूक 2:4)

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"धन्य वे हैं जिन्हों ने बिना देखे विश्वास किया॥ शद्रक , मेशक , अबेदनगो को  हम सब जानते है... जब राजा नबूकदनेस्सर ने सबको मूरत केे सामने दण्डवत् करने की आज्ञा दी...तब उस समय शद्रक , मेशक और अबेदनगो को छोड़ कर सब लोगो ने मूरत को दण्डवत् किया... और तब राजा  क्रोधित होकर उन तीनो को धधकते हुए आग केे भट्ठे में डाल देता है...तभी भी उन तीनो को यह विश्वास था की परमेश्वर उनकी रक्षा करेंगे... और ठीक ऐसा ही हुआ... परमेश्वर ने उन तीनों को धधकते हुए आग केे भट्ठे में जलने से बचाता है l और शद्रक , मेशक और अबेदनगो के इस विश्वास को सच्चा विश्वास कहते है...l उसी प्रकार हमारा भी विश्वास होना चाहिये...चाहे कोई भी समस्या हो , अगर हमे विश्वास है तो परमेश्वर हमें हमारी समस्याओ से आजाद करेगा l और फिर देखिये परमेश्वर आपके जीवन में अदभुत काम करना शुरू करेगा जो आप सोच भी नहीं सकते...lऔर अंत में , आपकी परिस्थिति जैसा भी हो , आप अपने विश्वास को कभी भी कमजोर होने मत दीजियेगा क्योंकी वचन कहता है -  "...धर्मी अपने विश्वास के द्वारा जीवित रहेगा। (हबक्कूक 2:4) आमीन परमेश्वर आप सभी को आशीष दे रैव...

इस संसार रुपी जहाज पर जिसमें हम सवार होकर चल रहे हैं , यह कभी तुफानों में फसता है , कभी खाईयों से होकर इसे गुजरना पडता है ,कभी चोरों और डाकुओं के क्षेत्र से होकर जाना पडता है , कभी इसे गरीबी के दलदल से होकर गुजरना पडता है , कभी सियाह काली रातों का सामना इसे करना पडता है ; जहाँ टटोलने पर भी कुछ नही दिखाई देता , कभी ऐसे मुसाफिरों का सामना करना पडता है , जो धोखा देने मे महारत हासिल किये होते हैं , कभी ऐसे मोंसमों का सामना करना पडता है ; जहाँ बिमारी आ जाती है ।इन सब के बावजूद हमारा परमेश्वर हमें बचाता है सम्भालता है अपने पंखों तले वो हमें लेने के लिए बुलाता है एक बार नहीं कई बार आवाज देता है अगर हम उसकी आवाज सुनकर सम्भल जाते हैं तब वो हमारे जीवन रुपी जहाज की पूरी तरह से रक्षा करके तट तक लगा देता है और हम उद्बार पा जाते हैं क्योंकि वो हमारा परमेश्वर है जो अति सहजता से हमें मिलता है बस विश्वास उस पर होना चाहिए वो हमारे जीवन रुपी जहाज को कभी भी ढूबने न देगा । चाहे पृथ्वी उलट जाए , पहाड समुद्र के बीच डाल दिये जाएँ ,हमें कुछ नही होगा क्योंकि परमेश्वर ने हमें अपने पंखों तले ले लिया है ।यही सच्चाई है जो उस पर विश्वास करता है उसका मुँह कभी काला होने नही पाता ।

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हमारा परमेश्वर हमारा शरणस्थान है जिसकी शरण में आकर हम हमेशा अपने को पूरी तरह से सुरक्षित पाते है, जिस प्रकार मुर्गी अपने बच्चों को अपने पंखों के भीतर छुपा लेती फिर चाहे कितनी ही आंधीयां आएँ कितनी भी बरसात पडे उसके पंखों तले बच्चे सुरक्षित रहते हैं बिना डरे अन्दर रहते हैं वैसे ही हमारा परमेश्वर भी है । इस संसार रुपी जहाज पर जिसमें हम सवार होकर चल रहे हैं , यह कभी तुफानों में फसता है , कभी खाईयों से होकर इसे गुजरना पडता है ,कभी चोरों और डाकुओं के क्षेत्र से होकर जाना पडता है , कभी इसे गरीबी के दलदल से होकर गुजरना पडता है , कभी सियाह काली रातों का सामना इसे करना पडता है ; जहाँ टटोलने पर भी कुछ नही दिखाई देता , कभी ऐसे मुसाफिरों का सामना करना पडता है , जो धोखा देने मे महारत हासिल किये होते हैं , कभी ऐसे मोंसमों का सामना करना पडता है ; जहाँ बिमारी आ जाती है । इन सब के बावजूद हमारा परमेश्वर हमें बचाता है सम्भालता है अपने पंखों तले वो हमें लेने के लिए बुलाता है एक बार नहीं कई बार आवाज देता है अगर हम उसकी आवाज सुनकर सम्भल जाते हैं तब वो हमारे जीवन रुपी जहाज की पूरी तरह से रक्षा करक...

इस संसार में कोई शख्स ऐसा नहीं है , जिसकी ज़िंदगी में परेशानियां न हों। सुख- दुःख , धूप - छांव की तरह आते जाते रहते हैं| बहुत से लोग कहते हैं यदि जीवन में परेशानियां न हो तो , ज़िन्दगी बेरंग हो जाए। आपको सिर्फ़ मैदाने जंग में खड़े रहकर अपने हिस्से का काम करना है,हर परिस्थिति में परमेश्वर को धन्यवाद देना है और ईमान रखना है। लाल समुंदर कैसे दो भाग होगा , और यरीहो की शहरपनाह कैसे गिरेगी? ये सोचना आपका काम नहीं है। आप अपना काम कीजिये , ख़ुदा अपना काम करेगा। और आपको हर परेशानी से निकाल कर आशीष देगा।

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इस संसार में कोई शख्स ऐसा नहीं है , जिसकी ज़िंदगी में परेशानियां न हों। सुख- दुःख , धूप - छांव की तरह आते जाते रहते हैं| बहुत से लोग कहते हैं यदि जीवन में परेशानियां न हो तो , ज़िन्दगी बेरंग हो जाए। परेशानियों के दौरान आपके पास दो हो विकल्प होते हैं--  (1) – परेशानियों से भागना- अगर परेशानियों से भागेंगे , तो कहां तक और कब तक भागेंगे। (2) --- परेशानियों का सामना करना।  समस्याएं आनी ही हैं , तो क्यों न ख़ुद को मानसिक रूप से तैयार रखें| हारे हुए सैनिक का साथ  तो उसका साया भी नहीं देता है।        2 शमुएल-- 20-17में लिखा है --- खड़े होकर यहोवा की ओर से अपना बचाव देखना , मत डरो तुम्हारा मन कच्चा न हो , कल उनका सामना करने को चलना और यहोवा परमेश्वर तुम्हारे साथ रहेगा। आपको सिर्फ़ मैदाने जंग में खड़े रहकर अपने हिस्से का काम करना है,हर परिस्थिति में परमेश्वर को धन्यवाद देना है और ईमान रखना है। लाल समुंदर कैसे दो भाग होगा , और यरीहो की शहरपनाह कैसे गिरेगी? ये सोचना आपका काम नहीं है। आप अपना काम कीजिये , ख़ुदा अपना काम करेगा। और आपको हर परेशानी से निकाल कर आ...

इसी प्रकार हम प्रभु यीशु की ओर ताकते रहें तो प्रभु यीशु मसीह के सारे गुण और लियाकत हमारे अन्दर उंडेल दिये जाते हैं। वह स्वयं हमारे जीवन के लिए एक मिसाल है। हम किसी सलाह और मदद के लिये मनुष्य की ओर देखेंगे तो हम निराश हो जायेंगे और ठोकर खायेंगे। परन्तु हमें निरन्तर प्रभु को हमारी धार्मिकता और जीवन के रूप में देखना चाहिये, और वह हमें उसके गुणों से भर देगा। आपको यदि उसके जैसा बनना हो तो विश्वास से कहना पडे़गा, ‘हे प्रभु, आपका जीवन मुझमें उँडे़लो,’ आपको नम्र बनना हो तो उससे कहिये, ‘प्रभु, मुझे आपके समान नम्र और दीन बनाओ।’

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एक बड़ी चट्टान में से एक छोटा टुकड़ा खोदकर निकाला जाय तो, बड़ी चट्टान के सारे गुण यह छोटे टुकडे में मिलेंगे। इसी प्रकार हम प्रभु यीशु की ओर ताकते रहें तो प्रभु यीशु मसीह के सारे गुण और लियाकत हमारे अन्दर उंडेल दिये जाते हैं। वह स्वयं हमारे जीवन के लिए एक मिसाल है। हम किसी सलाह और मदद के लिये मनुष्य की ओर देखेंगे तो हम निराश हो जायेंगे और ठोकर खायेंगे। परन्तु हमें निरन्तर प्रभु को हमारी धार्मिकता और जीवन के रूप में देखना चाहिये, और वह हमें उसके गुणों से भर देगा। आपको यदि उसके जैसा बनना हो तो विश्वास से कहना पडे़गा, ‘हे प्रभु, आपका जीवन मुझमें उँडे़लो,’ आपको नम्र बनना हो तो उससे कहिये, ‘प्रभु, मुझे आपके समान नम्र और दीन बनाओ।’ आपके शत्रुओं से प्रेम करना हो तो उससे कहिये, ‘उन्हें माफ कर, क्योंकि वे जो कर रहे हैं उसे वे जानते नहीं है, ऐसा कहकर जो प्रेम आपने अपने दुश्मनों के प्रति दिखाया वही प्रेम मुझे भी दो।’ इसी प्रकार जब हमारी निंदा होती है तब हम उसकी ओर फिरते हैं और इस प्रकार हम ईश्वरीय गुणों को प्राप्त करते हैं।           ये सभी गुण, कृपा और सहनशीलता ह...

वचन के द्वारा परमेश्वर की गुप्त बातें :---

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वचन के द्वारा परमेश्वर की गुप्त बातें  :--- (1) परमेश्वर गुप्त में रहता है। (मत्ती 6:4) (2)वह अपने को गुप्त में रखता है। (यशा. 45:15) (3) गुप्त बातें परमेश्वर के वश में है। (व्य. वि. 29:29) (4) वही गूढ़ और गुप्त बातों का जानता है। (दानि.2:22) (5) वह सब गुप्त बातों का चाहे वे भली हो, या बुरी हो न्याय करेगा। (सभोप.12:14) (6)वह यीशु मसीह के द्वारा मनुष्यों की गुप्त बातों का न्याय करेगा। (रोमी. 2:16) (7) वह गुप्त बातों को प्रकाशित करता है। (भ. स.49:4) (8) उसकी प्रतिज्ञा है, गुप्त स्थानों में गड़ा हुआ धन दूंगा। (यशा.45:3) (9)जो जय पाए उसको मैं गुप्त मन्ना में से दूंगा। (प्र.वा.2:217) आमीन प्रभु आपको आशीष दे

लेकिन परमेश्वर ने अपने वचनों में हमेशा दीनता को ही प्राथमिकता दी हैं।दीन होने का मतलब है कि हम अपने दुर्बलताओं के बारे में जाने और परमेश्वर से हमे जो आशीषें मिली हैं उसके लिए हम परमेश्वर को धन्यवाद दे। हमें दीन इसलिए बनना है क्योंकि हम प्रभु के सिवाय और किसी पर घमण्ड नही कर सकते।हमारा मूल्य और फलवन्त होना प्रभु पर निर्भर हैं और परमेश्वर की सहायता के बिना हम कुछ भी नही कर सकते हैं।परमेश्वर दीनता से चलने वालों के साथ रहता हैं परमेश्वर दीनो को अनुग्रह देता हैं पर अभिमानियों से विरोध करता हैं।उसकी सन्तान प्रभु की सेवकाई दीनता से करते हैं।क्योकि हम विश्वासी हैं इसलिए हमें दूसरों के प्रति दीन होना चाहिए। कहते हैं हमेशा झुका हुआ पेड ही फल पाता है ,अगर हमने भी प्रभु की राह पर चलते हुए फल पाने है तो हमें दीनता और नम्रता में आना पड़ेगा। तभी हम अपने प्रभु के कार्य को कर पाएंगे,और उसके मन भावने पात्र बन पाएंगे

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आज के समय में बहुत सारे लोगो की सोच बन गयी हैं कि हम दीन क्यो बने। इस कारण से आज संसार दीनता को महत्व नही देता हैं। लेकिन परमेश्वर ने अपने वचनों में हमेशा दीनता को ही प्राथमिकता दी हैं। दीन होने का मतलब है कि हम अपने दुर्बलताओं के बारे में जाने और परमेश्वर से हमे जो आशीषें मिली हैं उसके लिए हम परमेश्वर को धन्यवाद दे।  हमें दीन इसलिए बनना है क्योंकि हम प्रभु के सिवाय और किसी पर घमण्ड नही कर सकते। हमारा मूल्य और फलवन्त होना प्रभु पर निर्भर हैं और परमेश्वर की सहायता के बिना हम कुछ भी नही कर सकते हैं। परमेश्वर दीनता से चलने वालों के साथ रहता हैं परमेश्वर दीनो को अनुग्रह देता हैं पर अभिमानियों से विरोध करता हैं। उसकी सन्तान प्रभु की सेवकाई दीनता से करते हैं। क्योकि हम विश्वासी हैं इसलिए हमें दूसरों के प्रति दीन होना चाहिए। दीनता का विपरीत हैं घमण्ड, जो उस व्यक्ति में पाया जाता हैं जो अपनी खूबी, श्रेष्ठता और उपलब्धियों के कारण अपने आप में अहंकार और स्वाभिमान की भावना रखता हैं।  कहते हैं हमेशा झुका हुआ पेड ही फल पाता है ,अगर हमने भी प्रभु की राह पर चलते हुए फल पाने है तो ...

यहुन्ना:-5=44 में येशू आईना दिखाते हुए कहते है --- तुम जो एक दूसरे से इज्ज़त चाहते हो पर वो इज्ज़त नहीं चाहते जो खुदा की तरफ से है ये बहुत बड़ी बात है की ख़ुदा हर इंसान को इज्ज़त बख्शना चाहता है| दुनियावी इज्ज़त का क्या , आज है कल नहीं रहेगी| इज्ज़त तो वो है जो जीते जी बनी रहे , और मरने के बाद भी कायम रहे| जो इज्ज़त ख़ुदा बख्शता है , वो हमेशा कायम रहती है। भजनसंहिता--3:3 में लिखा है कि परमेश्वर हमारे मस्तक को ऊंचा करने वाले हैं, और भजनसंहिता--3:4 में लिखा है कि उनकी ओर ताकने वाले कभी शर्मिंदा नहीं होंगे।

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कहते हैं इज्ज़त की दौलत से बढ कर कोई दौलत नहीं |  इज्ज़त वो है जो दिल से की जाती है| किसी ज़माने में महायाजकों , फ़रिसियों और शास्त्रियों का एक ख़ास मुकाम होता था| ये चाहते थे की लोग उनकी इज्ज़त करें , ये  अपने आप को किसी ख़ुदा से कम समझते थे| आज भी हर जगह इज्ज़त की बड़ी मारा मारी है , ऐसे भी दौलतमंद देखे गए हैं , जिनके बैठने के लिए ख़ास बैंच होती है| और जिनके पास कुछ सरकारी अधिकार हैं , वो भी अपने आप को किसी ख़ुदा से कम नहीं समझते, यहुन्ना:-5=44 में येशू आईना दिखाते हुए कहते है --- तुम जो एक दूसरे से इज्ज़त चाहते हो पर वो इज्ज़त नहीं चाहते जो खुदा की तरफ से है ये बहुत बड़ी बात है  की ख़ुदा हर इंसान को इज्ज़त बख्शना चाहता है| दुनियावी इज्ज़त का क्या , आज है कल नहीं रहेगी| इज्ज़त तो वो है जो जीते जी बनी रहे , और मरने के बाद भी कायम रहे| जो इज्ज़त ख़ुदा बख्शता है , वो हमेशा कायम रहती है। भजनसंहिता--3:3 में लिखा है कि परमेश्वर हमारे मस्तक को ऊंचा करने वाले हैं, और भजनसंहिता--3:4 में लिखा है कि उनकी ओर ताकने वाले कभी शर्मिंदा नहीं होंगे। आमीन प्रभु आपको आशीष दे रैव्ह राजेश गिरधर

जब ट्रेन किसी सुरंग में से गुजरती है और एकदम से अंधेरा हो जाता है तो आप अपनी टिकट को फेक कर ट्रेन से बाहर नही कूदते हो, क्योकि आप को ट्रेन चलाने वाले पर भरोसा होता है। जब जिंदगी की ट्रेन मुश्किलात दुखो और तकलीफों के अंधेरे से गुजर रही हो तो जिंदगी की ट्रेन को चलाने वाले पर भरोसा रखो, वो अंधेरो से जरूर निकाल देगा। बस कभी कभी ये सुरंग छोटी होती है तो कभी कभी बहोत लम्बी, पर यकीन रखो सुरंग ही है । जिसके दूसरी तरफ रोशनियां और उजाला ही उजाला होता है ।आपस मे तालमेल व संपर्क बनाये रखे और एक दूसरे को Motivate करते रहे | हे प्रभु सब पर कृपा बनाए रखना ।

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जब ट्रेन किसी सुरंग में से गुजरती है और एकदम से अंधेरा हो जाता है तो आप अपनी टिकट को फेक कर ट्रेन से बाहर नही कूदते हो, क्योकि आप को ट्रेन चलाने वाले पर भरोसा होता है। ...... इसी तरह...... जब जिंदगी की ट्रेन मुश्किलात दुखो और तकलीफों के अंधेरे से गुजर रही हो तो जिंदगी की ट्रेन को चलाने वाले पर भरोसा रखो, वो अंधेरो से जरूर निकाल देगा। बस कभी कभी ये सुरंग छोटी होती है तो कभी कभी बहोत लम्बी, पर यकीन रखो सुरंग ही है । जिसके दूसरी तरफ रोशनियां और उजाला ही उजाला होता है । आपस मे तालमेल व संपर्क बनाये रखे और एक दूसरे को Motivate करते रहे हे प्रभु सब पर कृपा बनाए रखना । आमीन प्रभु आपको और आपके परिवार को आशीष दे

वक़्त की कमी ; ज़िन्दगी की भाग दौड़ , इन सब ने मिलकर इंसान को तोड़ कर रख दिया है| ना सिर्फ़ घर छोटे होते जा रहे हैं , बल्कि इंसान का दिल भी छोटा होता जा रहा है| इंसान धीरे धीरे , खुदगर्ज़ होता जा रहा है , और रिश्तों में दूरियां बढ़ती जा रही हैं| इस सफ़र में हम अपने पूर्वजों की संस्कृति से कितना दूर निकल आये है| इब्रानियों 13:2 में लिखा है –मेहमान नवाज़ी करना ना भूलना , क्योंकि इसके द्वारा , कितनों ने अनजाने में , फ़रिश्तों की मेहमान नवाज़ी की है|

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वक़्त की कमी ; ज़िन्दगी की भाग दौड़ , इन सब ने मिलकर इंसान को तोड़ कर रख दिया है| ना सिर्फ़ घर छोटे होते जा रहे हैं , बल्कि इंसान का दिल भी छोटा होता जा रहा है| इंसान धीरे धीरे , खुदगर्ज़ होता जा रहा है , और रिश्तों में दूरियां बढ़ती जा रही हैं| इस सफ़र में हम अपने पूर्वजों की संस्कृति से कितना दूर निकल आये है| घर की मुंडेर पर कौआ बोले , तो लोग ख़ुश हो जाते थे , कि मेहमान आने वाला है| किसी शायर ने क्या ख़ूब लिखा है --- बहुत दिनों से कोई मेहमान नहीं आया , कहीं  घर से बरकत ना उठ जाए| हम उस युग में जी रहे हैं , जहां मेहमान नवाज़ी , मुसीबत समझी जाती है| मेहमान आता बाद में है , उसके वापस जाने की बात ,पहले पूछी जाती है|  इब्रानियों 13:2 में लिखा है –मेहमान नवाज़ी करना ना भूलना , क्योंकि इसके द्वारा , कितनों ने अनजाने में , फ़रिश्तों की मेहमान नवाज़ी की है| मेहमान नवाज़ी एक जज़्बा है , जो दरियादिल लोगों में पाया जाता है| आज किसी के लिए समय निकलना , मंहगा सौदा माना जाता है| चलो बैलगाड़ी के युग में लौट चलें ; किसी के मेहमान बने , किसी को मेहमान बनाएं| आमीन प्रभु का अनुग्रह हमेशा आपके ...

तेरा नाम पवित्र माना जाए। मत्ती 6:9_हमारी प्रार्थनाओ में सबसे अधिक ध्यान और हमारे जीवनों में भी परमेश्वर के नाम को पवित्र कहना होना चाहिए।तेरा राज्य आए। मत्ती 6:10_यह प्रार्थना करना कि तेरी इच्छा पूरी हो का अर्थ है निष्कपटता से इच्छा करना कि परमेश्वर की इच्छा व उद्देश्य हमारे परिवारों के जीवन में पूरी हो, उसकी अनन्त योजना के अनुसार।प्रतिदिन की रोटी। मत्ती 6:11_प्रार्थना में व्यक्ति की वचन की आवश्यकता व दैनिक आवश्यकताओं के लिए निवेदन होना।अपराध को क्षमा करना। मत्ती 6:12_हमें दूसरो के अपराध को क्षमा करना सीखना चाहिए ताकि वैसी ही क्षमा हमें हमारी गलतियों की मिलने पाए।हमें बुराई से बचा। मत्ती 6:13_हमें प्रार्थना करना है कि संसार की बुराइयों से परमेश्वर हमें बचाएं।

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प्रभु की प्रार्थना। ऐ हमारे पिता तू जो स्वर्ग मे है-  मत्ती 6:9 प्रार्थना में परमेश्वर की आराधना होती हैं। पिता परमेश्वर हम से प्रेम करता हैं हमारी चिंता करता हैं तथा हमारी संगति व घनिष्टता का स्वागत करता है, मसीह के द्वारा हमारी पहुँच आराधना के लिए भी हैं ताकि हम अपनी आवश्यकताएँ बता सके जैसे हम अपने सांसारिक पिता को बताते हैं। लेकिन यह सांसारिक पिता से बढ़कर हैं। वह आशीष व दण्ड दोनो दे सकता हैं। वह अपने बच्चों को क्या प्रतिक्रिया देता हैं वह हमारे विश्वास और आज्ञाकारिता पर निर्भर करता हैं। तेरा नाम पवित्र माना जाए। मत्ती 6:9 हमारी प्रार्थनाओ में सबसे अधिक ध्यान और हमारे जीवनों में भी परमेश्वर के नाम को पवित्र कहना होना चाहिए। तेरा राज्य आए। मत्ती 6:10 यह प्रार्थना करना कि तेरी इच्छा पूरी हो का अर्थ है निष्कपटता से इच्छा करना कि परमेश्वर की इच्छा व उद्देश्य हमारे परिवारों के जीवन में पूरी हो, उसकी अनन्त योजना के अनुसार। प्रतिदिन की रोटी। मत्ती 6:11 प्रार्थना में व्यक्ति की वचन की आवश्यकता व दैनिक आवश्यकताओं के लिए निवेदन होना। अपराध को क्षमा करना। मत्ती 6:12 हमें दूसरो क...

परमेश्वर के जन के गुण।:---

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परमेश्वर के जन के गुण।:----- (1)= वे पवित्र शास्त्र का ज्ञान रखते हैं।        (2 तीमु .3:15-17)     (2)= वे पूर्ण सिद्ध होते हैं।    (2तीमु. 3:17) (3)= प्रत्येक भले काम के लिए तत्पर रहते है।  (2 तीमु. 3:17) (4)=पवित्र आत्मा से प्रेरित रहते हैं। (2 तीमु. 3:16-17) (5)=यहोवा स्वंय को उस पर प्रगट करता है।  ( गिनती 12:6) (6)=वे एक मन होकर प्रार्थना करते हैं। (मत्ती 18:19) आमीन प्रभु आपको आशीष दे रैव्ह राजेश गिरधर

अपने लिए नहीं दूसरों के लिए जीना ही सच्चा जीवन है:-दुनिया में कोई भी चीज़ अपने आपके लिए नहीं बनी । दरिया - : खुद अपना पानी नहीं पीता । पेड़ - : खुद अपना फल नहीं खाते । फूल - : अपनी खुशबु अपने लिए नहीं बिखेरते ।मधुमक्खी - : खुद अपना शहद नही खाती ! मालूम है क्यों .. ?? " क्योंकि दूसरों के लिए ही जीना ही असल जिंदगी हैं । 🌹🙏

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अपने लिए नहीं दूसरों के लिए जीना ही सच्चा जीवन है:- दुनिया में कोई भी चीज़ अपने आपके लिए नहीं बनी ।  दरिया - : खुद अपना पानी नहीं पीता ।  पेड़ - : खुद अपना फल नहीं खाते ।  फूल - : अपनी खुशबु अपने लिए नहीं बिखेरते । मधुमक्खी - : खुद अपना शहद नही खाती !  मालूम है क्यों .. ??  " क्योंकि दूसरों के लिए ही जीना ही असल जिंदगी हैं ।  🌹🙏

जिसके पास ज्यादा पैसा है वो उस पर घमण्ड करता है , कोई अपनी ताकत पर घमण्ड करता है , कोई अपनी खूबसूरती पर घमड करता है न जाने क्यों ? जबकि सब जानते हैं यह सब बैकार है, एक दिन ऐसा आएगा जब यह ताकत, सुन्दरता, पैसा साथ छोड देगी , अपना खुद का चैहरा भी आईने में देखकर यकीन नहीं होगा यह मैं हूँ,या कोई और? अपना शरीर भी साथ छोड देगा , दवाओं के सहारे जीवन चलने लगेगा , हर समय एक सहारे की आवश्यकता होगी ; और जब इस शरीर से आत्मा निकाल ली जाएगी तो यही शरीर जिस पर सबको घमण्ड होता है , खुद के परिवार वालों को गन्दा लगने लगेगा कहेंगे जल्दी से इसे दफनाओ नहीं तो बदबू आ जाएगी ? जब सब जानते हैं , यह हाल होनेवाला है तो घमण्ड किस लिये ? क्योंकि परमेश्वर घमण्डी लोगों से नफरत करता है वह घमण्डी लोगों की सुन्दरता को ताकत को बुद्बिमान की बुद्बि को नष्ट करता है , मनुष्य कितना ही अपने आप को इन से बचाने का प्रयास करे ; मगर परमेश्वर सब को नष्ट करता है , और सब अभिमानियों को मिट्टी में मिला देता है । जब मिट्टी में मिलना ही है तो घमण्ड किस लिये। सभोपदेशक की पुस्तक में साफ साफ लिखा है:- सब कुछ व्यर्थ है सुन्दरता , बुद्बि , ताकत , राजपाठ , सब जाता रहेगा तो क्यों न आज ही इस घमण्ड को अपने आप से दूर करके प्रेम का जीवन बिताएँ ताकि सब व्यर्थ है तो साधारण बनकर जीवन जीएँ और लोगों को भी जीने दें ।और प्रभु की आशीष पाऐं

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परमेश्वर ने जो कुछ भी बनाया सुन्दर ही बनाया, चाहे वो प्रकृति हो , नदियां हो , झरने हो , जानवर हो , या सबसे खूबसूरत इन्सान , परमेश्वर ने जो कुछ भी बनाया स्वतंत्र इच्छा से सुन्दर ही बनाया मगर परमेश्वर की बाकी कलाकृतियों को हम छोड दें तब उसमे से जो मनुष्य है वही सिर्फ पाप करता है , उसी को अपनी सुन्दरता पर घमंड होता है, कभी पहाड अपनी ऊँचाई पर घमण्ड नहीं करता , नदी अपने पानी पर घमण्ड नहीं करती , पैड पौधे अपनी सुन्दरता पर घमंण्ड नहीं करते , जानवर कभी घमण्ड नही करते , सिर्फ मनुष्य ही है जो परमेश्वर के विरुद्ध पाप भी करता है ; और घमंण्ड तो उसमें इतना है कि वो अपने आगे किसी को कुछ समझता ही नहीं । जिसके पास ज्यादा पैसा है वो उस पर घमण्ड करता है , कोई अपनी ताकत पर घमण्ड करता है , कोई अपनी खूबसूरती पर घमड करता है न जाने क्यों ? जबकि सब जानते हैं यह सब बैकार है, एक दिन ऐसा आएगा जब यह ताकत, सुन्दरता, पैसा साथ छोड देगी , अपना खुद का चैहरा भी आईने में देखकर यकीन नहीं होगा यह मैं हूँ,या कोई और? अपना शरीर भी साथ छोड देगा , दवाओं के सहारे जीवन चलने लगेगा , हर समय एक सहारे की आवश्यकता होगी ...

परमेश्वर हमारा प्राकृतिक वातावरण है। हम उसकी मौजूदगी में जीने के लिए बने हैं। हमें उससे जुड़ना है क्योंकि उससे ही जीवन का अस्तित्व है। - आइए परमेश्वर से जुड़े रहें। याद रखें कि मछली के बिना पानी अभी भी पानी है, लेकिन मछली बिना पानी के कुछ भी नहीं है पेड़ के बिना मिट्टी अभी भी मिट्टी है, लेकिन बिना मिट्टी के पेड़ कुछ भी नहीं... - मनुष्य के बिना परमेश्वर अभी भी परमेश्वर है, लेकिन परमेश्वर बिना मनुष्य कुछ नहीं- यदि यह संदेश आप तक पहुँचता है और आप इसे दूसरों के साथ साझा करते हैं, तो इसे सुसमाचार कहा जाता है।

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जब परमेश्वर ने मछली रचना चाहा, तो उन्होंने समुद्र से बात की।  जब परमेश्वर ने पेड़ बनाना चाहा, तो उन्होंने धरती से बात की।  लेकिन जब परमेश्वर ने मनुष्य बनाना चाहा, तो उन्होंने खुद की ओर रुख किया।  तो परमेश्वर ने कहा: "आइए हम मनुष्य को अपने स्वरूप और समानता में बनाएं"।  ध्यान दें:  - अगर आप पानी में से एक मछली निकालते हैं, तो वह मर जाएगी ; और जब आप किसी पेड़ को जमीन से हटाते हैं, तो वह भी मर जाता है।  इसी तरह, जब मनुष्य परमेश्वर से अलग हो जाता है, तो वह मर जाता है परमेश्वर हमारा प्राकृतिक वातावरण है। हम उसकी मौजूदगी में जीने के लिए बने हैं।  हमें उससे जुड़ना है क्योंकि उससे ही जीवन का अस्तित्व है। - आइए परमेश्वर से जुड़े रहें।  याद रखें कि मछली के बिना पानी अभी भी पानी है, लेकिन मछली बिना पानी के कुछ भी नहीं है  पेड़ के बिना मिट्टी अभी भी मिट्टी है, लेकिन बिना मिट्टी के पेड़ कुछ भी नहीं...  - मनुष्य के बिना परमेश्वर अभी भी परमेश्वर है, लेकिन परमेश्वर बिना मनुष्य कुछ नहीं - यदि यह संदेश आप तक पहुँचता है और आप इसे दूसरों के साथ सा...

यीशु मसीह को ग्रहण करने के बाद हम दस आशीषों के वारिस बनते हैं ,जो वचन के अनुसार इस प्रकार हैं।

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यीशु मसीह को ग्रहण करने के बाद हम दस आशीषों के वारिस बनते हैं ,जो वचन के अनुसार इस प्रकार हैं। 1* परमेश्वर के प्रेम में बने रहते है। (रोमी. 8:39) 2* परमेश्वर की संतान कहलाते हैं। (गला. 2:26) 3* परमेश्वर की निकटता में रहते हैं। (इफि. 2:13) 4* यीशु मसीह के द्वारा बुलाए हुए होते हैं। (फिलि. 3:24) 5* विश्वास और प्रेम में रहते हैं।( 1तीमु. 1:14) 6* अनन्त जीवन पाते हैं।( 1यूहन्ना 2:10) 7* सुरक्षित रहते हैं। (यहूदा 1:1) 8* उन पर दंड की आज्ञा नहीं होती है। (रोमी. 8:1) 9* पाप और मृत्यु की व्यवस्था से स्वतंत्र होते है।( रोमी . 8:2) 10* वे सत्य में बनें रहते हैं। (रोमी. 9:1) आमीन प्रभु आप सबको आशीष दे रैव्ह राजेश गिरधर

भय आपका सबसे बड़ा दुश्मन है| आप ही उससे लड़ कर जीत सकते हैं| इस युद्ध में कोई दूसरा आपकी सहायता नहीं कर सकता| डर आपके दिल ओ दिमाग़ में है , जिस पर केवल आपका अधिकार है| जो दुश्मन बाहर हो उससे लड़ना आसान है , अन्दर बैठे शत्रु से जीतना , अगर नामुमकिन नहीं तो मुश्किल ज़रूर है| क्या आपकी ज़िन्दगी में भी , कोई डर है जो आपको आगे बढ़ने से रोक रहा है| भजन 49:5 में लिखा है --- विपत्ति के दिनों में जब मैं अपने अड़ंगा मारने वालों की बुराई से घिरुं ; तब मैं क्यों डरूं? समस्याओं के काले साये हों , दुखों की बारिश हो ; उम्मीद के चिराग़ बुझने को हों , तब भी दिल से एक आवाज़ उभरनी चाहिए , ख़ुदा मेरे साथ है,मैं क्यों डरूं?

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भय आपका सबसे बड़ा दुश्मन है| आप ही उससे लड़ कर जीत सकते हैं| इस युद्ध में कोई दूसरा आपकी सहायता नहीं कर सकता| डर आपके दिल ओ दिमाग़ में है , जिस पर  केवल आपका अधिकार है| जो दुश्मन बाहर हो उससे लड़ना आसान है , अन्दर बैठे शत्रु से जीतना , अगर नामुमकिन नहीं तो मुश्किल ज़रूर है| पतरस ने यीशु के साथ जीने और मरने का दावा किया ; मगर  हकीक़त कुछ और थी| अपने अन्दर छुपे हुए डर को , पतरस भी नहीं पहचान पाया| मगर ये एक ऐसा दुश्मन था , जिसे तलवार से नहीं हराया जा सकता डर और वो भी सलीबी मौत का डर , शायद वो पतरस के कद से भी कहीं बड़ा था| पतरस उस डर के सामने बौना साबित हुआ| क्या आपकी ज़िन्दगी में भी , कोई डर है जो आपको आगे बढ़ने से रोक रहा है| भजन 49:5 में लिखा है --- विपत्ति के दिनों में जब मैं अपने अड़ंगा मारने वालों की बुराई से घिरुं ; तब मैं क्यों डरूं? समस्याओं के काले साये हों , दुखों की बारिश हो ; उम्मीद के चिराग़ बुझने को हों , तब भी दिल से एक आवाज़ उभरनी चाहिए , ख़ुदा मेरे साथ है,मैं क्यों डरूं? आमीन प्रभु ही हमे जयवन्त जीवन देता है रैव्ह राजेश गिरधर

बाईबल कहती है:- जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पडो , तो इसको पूरे आनन्द की बात समझो ।यह बात सब पर फिट बैठती है फर्क इतना है एक विश्वासी इसे अपने जीवन में प्रभु की कृपा मानता है , और अविश्वासी इसे दुख , एक विश्वासी को भरोसा होता है परमेश्वर उसे बचाएगा , वहीं अविश्वासी यह सोचता है अब मैं क्या करुँ ? मेरा क्या होगा ? लिखा है परमेश्वर का जन विश्वास से ही जीवित रहेगा और इस महामारी में जिसने सच्चाई से परमेश्वर पर विश्वास किया , प्रार्थना की , वो बचाया गया , उसके घर में किसी भी भली वस्तु की घटी होने न पाई । यह सब हमें मजबूत करने के लिये हुआ , हमारे विश्वास को और मजबूत करने के लिये हुआ , ताकि और आनेवाले समय में हम उन घटनाओं को झेल सकें जो आनेवाली हैं । बस अपने विश्वास को मजबूती से थामें रहो परिक्षाएं तो आएँगी ही मगर परमेश्वर उन से बाहर निकलने का रास्ता भी दिखाएगा और हमें आनन्द के महासागर में लेकर जाएगा जहाँ न तो आसूं होंगे और न ही रोना पीटना तो ठहरे रहना परमेश्वर सब बातों में बचानेवाला है ।

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बाईबल कहती है:- जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पडो , तो इसको पूरे आनन्द की बात समझो । यह बात सब पर फिट बैठती है फर्क इतना है एक विश्वासी इसे अपने जीवन में प्रभु की कृपा मानता है  , और अविश्वासी इसे दुख  ,  एक विश्वासी को भरोसा  होता है परमेश्वर उसे बचाएगा ,  वहीं अविश्वासी यह सोचता है अब मैं क्या करुँ ? मेरा क्या होगा  ? अगर हम 2020 में पीछे मुडकर देखते  तो हम कांप उठते हैं  , वो ऐसा वक्त था जब सब कुछ ठहर गया , सब जहाँ थे वहीं रुक गये  ,  जो घर में था वही ठहर गया जो गाँव में था वही ठहर गया चारो तरफ सिर्फ रोना , बिलखना ही दिखाई देता था , किसी के पास काम नहीं तो किसी के पास खाना नहीं पैसा होते हुए भी उसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे,चारों एक ऐसा खोफ  , जैसा राजा फिरोन के समय देखने को मिला जब परमेश्वर ने मिस्र दस महामारी को डाला था  । हर घर से रोने की आवाज आती,बस सब रो रहे थे  , ऐसा ही परमेश्वर ने  फिर दिखा दिया  ; कोई किसी के पास अगर जाना चाहे तो भी नहीं जाता था ।  यह खोफ दौबारा देखने को मिला ,...

वो एक गलत काम हमारी बहुत सी खूबियों को खत्म कर देता है उसी पर परमेश्वर की नजर रहती है क्योंकि वो हमारे अन्दर क्या चल रहा है और हम बाहर क्या दिखा रहे हैं यह सब वो जानता है उसी के हिसाब से फिर हमारे साथ होता भी है ।मन तो चंचल है सबसे अधिक वही मनुष्य को धोखा देनेवाला है उसी एक काम को करके मनुष्य दोषी ठहरता है, परमेश्वर न्याय करता है वो किसी का पक्षपात नहीं करता वो हमारे हर उस काम का दण्ड देता है जो हम मन की अभिलाषाओं में फसकर करते हैं वो राजाओं को भी दण्डित करता है तो आम आदमी का भी न्याय अटल है उसके न्याय आसन के सामने सब बराबर है कोई भेदभाव नहीं क्योकि उसने तो मनुष्य को बनाया व स्वतंत्र किया पर मनुष्य अपनी ही अभिलाषाओं में पडकर पाप कर बैठा है, जिसका भुगतान करना पडता है क्योंकि वो हमारी चाल चलन के अनुसार ही हमारे कामों का फल देता है जिससे कोई भी बच नहीं सकता ।

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बहुत बार हम कुछ ऐसे कामों को करते हैं जिन्हे करने को हमारी आत्मा गवाही नहीं देती पर हमारा दिमाग उस काम को करने में आगे भागता है और जब उस काम को हम कर लेते हैं तब हमें उस किये हुए काम का पछतावा होता है हमने यह क्यों किया ?  अगर इस काम को न करते तो अच्छा ही होता ऐसी सोच हमारे मन में आने लगती है मन गलानि से भर जाता है पछतावा होता है पर काम तो कर चुके और उसका भुगतान भी करना पडेगा वो एक गलत काम हमारी बहुत सी खूबियों को खत्म कर देता है उसी पर परमेश्वर की नजर रहती है क्योंकि वो हमारे अन्दर क्या चल रहा है और हम बाहर क्या दिखा रहे हैं यह सब वो जानता है उसी के हिसाब से फिर हमारे साथ होता भी है । मन तो चंचल है सबसे अधिक वही मनुष्य को धोखा देनेवाला है उसी एक काम को करके मनुष्य दोषी ठहरता है, परमेश्वर न्याय करता है वो किसी का पक्षपात नहीं करता वो हमारे हर उस काम का दण्ड देता है जो हम मन की अभिलाषाओं में फसकर करते हैं वो राजाओं को भी दण्डित करता है तो आम आदमी का भी न्याय अटल है उसके न्याय आसन के सामने सब बराबर है कोई भेदभाव नहीं क्योकि उसने तो मनुष्य को बनाया व स्वतंत्र क...

वो शुभ समाचार यह है कि यीशु मसीह परमेश्वर का बैटा है , उसने कुँवारी मरियम से जन्म लिया , मेरे ही पापों के कारण मारा गया , गाढा गया , तीसरे दिन मुर्दों में से जी उठा और दौबारा आने वाला है । यही वो शुभ समाचार है जिस पर हम यकीन करते और अपना जीवन प्रभु को सोंप देते हैं ।

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शुभ समाचार क्या है सबसे पहले हम यह जान लेते हैं कोई ऐसी बात जिसे सुनकर हम बैहद खुश हो जाएँ आनन्द मनाने लगें ऐसा लगे जैसे सब कुछ पा लिया अब कुछ चाहत नहीं ऐसा ही एक शुभ समाचार है जिसे परमेश्वर ने हर व्यक्ति के लिये रख छोडा है , ऐसी बात जो हर किसी के लिये है ना कि किसी जाती विशेष के लिए वो शुभ समाचार ही हमें इस जीवन में सान्त्वना दे सकता है वो शुभ समाचार ही हमें बचा सकता है , वो शुभ समाचार ही स्वर्ग जाने का एकमात्र रास्ता है और उस शुभ समाचार को सुनाना अपने मुँह से अंगिकार करना हर किसी के बस की बात नहीं जब तक प्रभु आज्ञा नहीं देता वो शुभ समाचार हमारे मुँह से नहीं निकल सकता मगर जब प्रभु आज्ञा देता है तो भीड की भीड शुभ समाचार सुनाने लगती है । वो शुभ समाचार यह है कि यीशु मसीह परमेश्वर का बैटा है , उसने कुँवारी मरियम से जन्म लिया , मेरे ही पापों के कारण मारा गया , गाढा गया , तीसरे दिन मुर्दों में से जी उठा और दौबारा आने वाला है । यही वो शुभ समाचार है जिस पर हम यकीन करते और अपना जीवन प्रभु को सोंप देते हैं ।  शुभ समाचार सुनाना पहले भी एक चुनोती थी आज भी एक चुनोती है पहले भी इस स...

हमारे जीवन की तरक्की के लिए बाईबल हमें कुछ बताती है जिसे हमे रोज अपने लिए लागू करना है,वह इस प्रकार है

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हमारे जीवन की तरक्की के लिए बाईबल हमें कुछ बताती है जिसे हमे रोज अपने लिए लागू करना है,वह इस प्रकार है :----- * परमेश्वर की बड़ाई करो। (भ. स.34:3) * एक साथ मिलकर उसके नाम को ऊँचा करो। (भ. स.34:3) * चखो और देखो कि परमेश्वर कैसा भला है। (भ. स.34:8) * यहोवा का भय मानो। (भ. स.34:9) * आओ मेरी सुनो। (भ. स.34:11) * जीभ को बुराई से रोक रखो। (भ. स.34:13) * मुँह की चौकसी करो। (भ. स.34:13) * बुराई से दूर रहो। (भ. स.34:14) * भलाई करो। (भ. स.34:14) * मेल को ढूढ़ो। (भ. स. 34:14) * मेल का पीछा करो। (भ. स.34:14) आमीन प्रभु आपको आशीष दे रैव्ह राजेश गिरधर