इस संसार रुपी जहाज पर जिसमें हम सवार होकर चल रहे हैं , यह कभी तुफानों में फसता है , कभी खाईयों से होकर इसे गुजरना पडता है ,कभी चोरों और डाकुओं के क्षेत्र से होकर जाना पडता है , कभी इसे गरीबी के दलदल से होकर गुजरना पडता है , कभी सियाह काली रातों का सामना इसे करना पडता है ; जहाँ टटोलने पर भी कुछ नही दिखाई देता , कभी ऐसे मुसाफिरों का सामना करना पडता है , जो धोखा देने मे महारत हासिल किये होते हैं , कभी ऐसे मोंसमों का सामना करना पडता है ; जहाँ बिमारी आ जाती है ।इन सब के बावजूद हमारा परमेश्वर हमें बचाता है सम्भालता है अपने पंखों तले वो हमें लेने के लिए बुलाता है एक बार नहीं कई बार आवाज देता है अगर हम उसकी आवाज सुनकर सम्भल जाते हैं तब वो हमारे जीवन रुपी जहाज की पूरी तरह से रक्षा करके तट तक लगा देता है और हम उद्बार पा जाते हैं क्योंकि वो हमारा परमेश्वर है जो अति सहजता से हमें मिलता है बस विश्वास उस पर होना चाहिए वो हमारे जीवन रुपी जहाज को कभी भी ढूबने न देगा । चाहे पृथ्वी उलट जाए , पहाड समुद्र के बीच डाल दिये जाएँ ,हमें कुछ नही होगा क्योंकि परमेश्वर ने हमें अपने पंखों तले ले लिया है ।यही सच्चाई है जो उस पर विश्वास करता है उसका मुँह कभी काला होने नही पाता ।
हमारा परमेश्वर हमारा शरणस्थान है जिसकी शरण में आकर हम हमेशा अपने को पूरी तरह से सुरक्षित पाते है, जिस प्रकार मुर्गी अपने बच्चों को अपने पंखों के भीतर छुपा लेती फिर चाहे कितनी ही आंधीयां आएँ कितनी भी बरसात पडे उसके पंखों तले बच्चे सुरक्षित रहते हैं बिना डरे अन्दर रहते हैं वैसे ही हमारा परमेश्वर भी है ।
इस संसार रुपी जहाज पर जिसमें हम सवार होकर चल रहे हैं , यह कभी तुफानों में फसता है , कभी खाईयों से होकर इसे गुजरना पडता है ,कभी चोरों और डाकुओं के क्षेत्र से होकर जाना पडता है , कभी इसे गरीबी के दलदल से होकर गुजरना पडता है , कभी सियाह काली रातों का सामना इसे करना पडता है ; जहाँ टटोलने पर भी कुछ नही दिखाई देता , कभी ऐसे मुसाफिरों का सामना करना पडता है , जो धोखा देने मे महारत हासिल किये होते हैं , कभी ऐसे मोंसमों का सामना करना पडता है ; जहाँ बिमारी आ जाती है ।
इन सब के बावजूद हमारा परमेश्वर हमें बचाता है सम्भालता है अपने पंखों तले वो हमें लेने के लिए बुलाता है एक बार नहीं कई बार आवाज देता है अगर हम उसकी आवाज सुनकर सम्भल जाते हैं तब वो हमारे जीवन रुपी जहाज की पूरी तरह से रक्षा करके तट तक लगा देता है और हम उद्बार पा जाते हैं क्योंकि वो हमारा परमेश्वर है जो अति सहजता से हमें मिलता है बस विश्वास उस पर होना चाहिए वो हमारे जीवन रुपी जहाज को कभी भी ढूबने न देगा । चाहे पृथ्वी उलट जाए , पहाड समुद्र के बीच डाल दिये जाएँ ,हमें कुछ नही होगा क्योंकि परमेश्वर ने हमें अपने पंखों तले ले लिया है ।
यही सच्चाई है जो उस पर विश्वास करता है उसका मुँह कभी काला होने नही पाता ।
आमीन
प्रभु आपको और आपके परिवार को आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर
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