बाइबिल का यह वचन हमें इस बात की ओर इशारा करता है हम मनुष्य परमेश्वर को अपनी अच्छाइयों के द्बारा प्रसन्ना नहीं कर सकते ? वो तो बस इतना चाहता है हम उसके भय को समझे , और उस भय में रहकर ही अपने प्रेम को दूसरों को भी दिखाते रहें , खुद प्रेम से रहें , दूसरों को भी प्रभु के प्रेम मे चलना सिखाएँ , बाइबिल हमें प्रेम करना ही सिखाती है | क्योंकि यीशु मसीह ने अपनी जान सबके लिये दी , बाइबिल कहती है , परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि अपना इकलौता बेटा भी दे दिया , यह इस बात का सबूत है परमेश्वर हमसे कितना प्रेम करता है , न कि किसी एक व्यक्ति , या किसी एक जाति से हम सब उसकी बैहतरीन रचना है ; उसने हमें अपने हाथों से रचा हमारे नथूनों में जीवन का शवास फूंका ताकि हम उसके जैसे हो जाएँ वो हमसे बहुत प्रेम करता है हमें भी इसी प्रकार एक दूसरे से प्रेम रखना सीखना होगा इससे ही हम परमेश्वर के सच्चे और अच्छे बच्चों में शामिल हो सकेंगे और उसकी सन्तान कहलाएँगे ।
बाइबिल का यह वचन हमें इस बात की ओर इशारा करता है हम मनुष्य परमेश्वर को अपनी अच्छाइयों के द्बारा प्रसन्ना नहीं कर सकते ?
कुछ लोगों का मानना है हमारे अच्छे काम़ो के द्बारा हम परमेश्वर को प्राप्त कर सकते हैं , उद्बार पा सकते हैं , बलिदान चडाकर परमेश्वर को खुश कर सकते हैं ; जो कि परमेश्वर नहीं चाहता ।
वो तो बस इतना चाहता है हम उसके भय को समझे , और उस भय में रहकर ही अपने प्रेम को दूसरों को भी दिखाते रहें , खुद प्रेम से रहें , दूसरों को भी प्रभु के प्रेम मे चलना सिखाएँ , बाइबिल हमें प्रेम करना ही सिखाती है , क्योंकि चाहे हम स्वर्ग दूतों की बौलियाँ भी बोलें और प्रेम न रखें तो हम ठनठनाता हुआ पीतल और झनझनाती हुई झाँझ ठहरेंगे ।
हमें दिखावे कि जिन्दगी से दूर रहकर सच्चाई से एक दूसरे से प्रेम रखना होगा , परमेश्वर इसी से खुश होगा ;
हर उस व्यक्ति से जो इस संसार में रहता है । क्योंकि यीशु मसीह ने अपनी जान सबके लिये दी , बाइबिल कहती है , परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि अपना इकलौता बेटा भी दे दिया , यह इस बात का सबूत है परमेश्वर हमसे कितना प्रेम करता है , न कि किसी एक व्यक्ति , या किसी एक जाति से हम सब उसकी बैहतरीन रचना है ; उसने हमें अपने हाथों से रचा हमारे नथूनों में जीवन का शवास फूंका ताकि हम उसके जैसे हो जाएँ वो हमसे बहुत प्रेम करता है हमें भी इसी प्रकार एक दूसरे से प्रेम रखना सीखना होगा इससे ही हम परमेश्वर के सच्चे और अच्छे बच्चों में शामिल हो सकेंगे और उसकी सन्तान कहलाएँगे ।
आमीन
प्रभु हम सबसे प्रेम करते हैं
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