पुण्य कर्मों की अनुकूल वायु का वेग आता है तो हमें शिखर पर पहुँचा देता है तथा पाप और अहंकार का झोंका आता है तो रसातल पर पहुँचा देता है।किसका मान ? किसका गुमान ? कहते हैं कि जीवन की सच्चाई को समझो। संसार के सारे संयोग हमारे अधीन नहीं हैं,कर्म के अधीन हैं और कर्म कब कैसी करवट बदल ले , कोई भरोसा नहीं। इसलिए परिस्थितियाँ ,जो कर्मों के अधीन हैं उनका कैसा गुमान।सो धीरज मे रहे और नम्र रहे । क्योंकि प्रभु घमण्डियों का सामना करता है,और दीनों पर दया करता है

एक बार कागज का एक टुकड़ा हवा के वेग से उड़ा और पर्वत के शिखर पर जा पहुँचा। पर्वत ने उसका आत्मीय स्वागत किया और कहा-भाई ! यहाँ कैसे पधारे ? कागज ने कहा-अपने दम पर। जैसे ही कागज ने अकड़ कर कहा अपने दम पर.और तभी हवा का एक दूसरा झोंका आया और कागज को उड़ा ले गया।अगले ही पल वह कागज नाली में गिरकर गल-सड़ गया।।
    जो दशा एक कागज की है वही दशा हमारी है।
 पुण्य कर्मों की अनुकूल वायु का वेग आता है तो हमें शिखर पर पहुँचा देता है तथा पाप और अहंकार का झोंका आता है तो रसातल पर पहुँचा देता है।
किसका मान ? किसका गुमान ? कहते हैं कि जीवन की सच्चाई को समझो। संसार के सारे संयोग हमारे अधीन नहीं हैं,कर्म के अधीन हैं और कर्म कब कैसी करवट बदल ले , कोई भरोसा नहीं। इसलिए परिस्थितियाँ ,जो कर्मों के अधीन हैं उनका कैसा गुमान।सो धीरज मे रहे और नम्र रहे । क्योंकि प्रभु घमण्डियों का सामना करता है,और दीनों पर दया करता है
आमीन
प्रभु हमारा दया का सागर है
रैव्ह राजेश गिरधर

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