बहुत बार हम परमेश्वर की आवाज को सुन नहीं पाते क्योंकि हम उसकी आवाज सुनना ही नहीं चाहते हमने अपने आप को इतना अधिक सांसारिक बना लिया है कि जब भी परमेश्वर हमसे कुछ कहता या कहना चाहता या कोई बात समझाने के लिये इशारा करता है तब भी हम उसे नहीं समझ पाते वजह हम खुद ही हैं | उसका यह विदा है उसने खुद कहा है मांगो तो पाओगे , खटखटाओगे तो खोला जाएगा अब यह हमारे ऊपर है हम क्या चाहते और क्या करते हैं हम स्वतन्त्र हैं हमें क्या चाहिए उसे लेने के लिये आगे भी रहेंगे हम चाबी वाला खिलोना नहीं, आजाद है वो आजादी हम प्रभु में इस्तेमाल करें या शैतानियत में यह हमारे ऊपर है ।

बहुत बार हम परमेश्वर की आवाज को सुन नहीं पाते क्योंकि हम उसकी आवाज सुनना ही नहीं चाहते हमने अपने आप को इतना अधिक सांसारिक बना लिया है कि जब भी परमेश्वर हमसे कुछ कहता या कहना चाहता या कोई बात समझाने के लिये इशारा करता है तब भी हम उसे नहीं समझ पाते वजह हम खुद ही हैं हम न तो उसकी आज्ञाओं को न मानते और न ही पूरे तन मन धन से उसकी खोज करते हैं ,अगर खोज भी करते हैं तो उसकी जो नाशवान है जो धीरे- धीरे मिटता जाता है खोज करते हैं तो उस पैसों की जिसे लेने के बाद सम्भाल न पाने के कारण वो पैसा भी हमसे दूर होता जाता है ।
और हम समझते हैं परमेश्वर हमारे साथ है यह सोच सोचकर खुश होते रहते हैं जबकि ऐसा होता नहीं ।
हम परमेश्वर की न सुनकर अपने अपने बुरे मन के हठ की बातों को ज्यादा महत्वपूर्ण मानते उसी के पीछे पडे भी रहते हैं । अपने मन की बुरी बुरी युक्तियों को पूरा करने का प्रयास भी करते रहते हैं ,अभी अगर हम परमेश्वर की आवाज सुने तो अपने मन को कठोर न करें बल्कि पूरी रीति उसके पीछे चलें उसे ढूँढे तो हम उसे पा जाएंगे ।
उसका यह विदा है उसने खुद कहा है मांगो तो पाओगे , खटखटाओगे तो खोला जाएगा अब यह हमारे ऊपर है हम क्या चाहते और क्या करते हैं हम स्वतन्त्र हैं हमें क्या चाहिए उसे लेने के लिये आगे भी रहेंगे हम चाबी वाला खिलोना नहीं, आजाद है वो आजादी हम प्रभु में इस्तेमाल करें या शैतानियत में यह हमारे ऊपर है ।
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर

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