खेत में दो तरह का बीज न बोना , मिलावट का कपड़ा मत पहनना| दो तरह के बीज , दो तरह के किरदार का प्रतीक है| एक अन्दर का , और एक बाहर का| मिलावट का लिबास , मानसिकता का प्रतीक है| इंसान बुरा है , मगर ख़ुद को अच्छा ज़ाहिर करता है| वो उथला है , मगर ख़ुद को गहरा बताता है| दिल में नफ़रत है , मगर मुहब्बत से पेश आता है| ज़हर खिलाने वाला , कोई क़रीबी ही होता है| ईश्वर के साथ भी कई बार , दोहरा रिश्ता होता है| लोग चर्च में जितने अच्छे होते हैं , बाहर नहीं होते हैं| { सब नहीं } तितली अपनी पहचान नहीं छिपाती , फिर इंसान क्यों छिपाता है, क्योंकि आज भी शरीर में पाप का अंश है।हमें अपनी प्रार्थना में मांगना चाहिए कि हमारा स्वभाव मसीह यीशु जैसा हो।अंदर और बाहर एक जैसा।
आप फूल और तितली को , उसके रंग और आकार से पहचान सकते हैं , मगर इंसान को नहीं| नाटक में अक्सर कलाकार , मुखौटे का उपयोग करते हैं| कुछ देर के लिए वो ख़ुद को उस किरदार में ढाल लेते हैं , मगर नाटक ख़त्म होते ही मुखौटा उतार दिया जाता है| एक बुरा शख्स भी , एक अच्छे शख्स का किरदार बखूबी निभा सकता है| दुनियां किसी रंगमंच से कम नहीं है , जहाँ हर क़दम पर मुखौटे की ज़रूरत है| पहचान पत्र रखने वाला शख्स भी , अपनी पहचान छिपाकर रखता है| लैव्यव्यवस्था 19:19 में ख़ुदा ने हुक्म दिया था --- अपने खेत में दो तरह का बीज न बोना , मिलावट का कपड़ा मत पहनना| दो तरह के बीज , दो तरह के किरदार का प्रतीक है| एक अन्दर का , और एक बाहर का| मिलावट का लिबास , मानसिकता का प्रतीक है| इंसान बुरा है , मगर ख़ुद को अच्छा ज़ाहिर करता है| वो उथला है , मगर ख़ुद को गहरा बताता है| दिल में नफ़रत है , मगर मुहब्बत से पेश आता है| ज़हर खिलाने वाला , कोई क़रीबी ही होता है| ईश्वर के साथ भी कई बार , दोहरा रिश्ता होता है| लोग चर्च में जितने अच्छे होते हैं , बाहर नहीं होते हैं| { सब नहीं } तितली अपनी पहचान नहीं छिपाती , फिर इंसान क्यों छिपाता है, क्योंकि आज भी शरीर में पाप का अंश है।
हमें अपनी प्रार्थना में मांगना चाहिए कि हमारा स्वभाव मसीह यीशु जैसा हो।
अंदर और बाहर एक जैसा।
आमीन
प्रभु आपको और आपके परिवार को आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर
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