हम परमेश्वर की पवित्रता का अर्थ समझ सकें और जैसे परमेश्वर पवित्र है, वैसे हम पवित्र बन सकें। 1पतरस=1-16 में परमेश्वर अपने दास के द्वारा कहता है, ‘पवित्र बनो, क्योंकि मैं पवित्र हूँ।’ हमें उसके समान पवित्र बनना है
हम परमेश्वर की पवित्रता का अर्थ समझ सकें और जैसे परमेश्वर पवित्र है, वैसे हम पवित्र बन सकें। 1पतरस=1-16 में परमेश्वर अपने दास के द्वारा कहता है, ‘पवित्र बनो, क्योंकि मैं पवित्र हूँ।’ हमें उसके समान पवित्र बनना है, पतरस, यूहन्ना, पौलुस, दानिय्येल, यशायाह या मूसा के समान नहीं। परमेश्वर कहता है, ‘पवित्र बनों क्योंकि मैं पवित्र हूँ।’ ’ इस ईश्वरीय दर्जे तक कोई भी व्यक्ति किसी भी मानवीय उपायों द्वारा पहुँच नहीं सकता। मनोबल, ज्ञान, उपवास, आँसूओं अथवा अन्य किसी साधनों के द्वारा वह प्राप्त नहीं हो सकता। पवित्र आत्मा मुझमें आये और मुझमें गहराई से काम करे तब ही मैं जैसे वह पवित्र है वैसे पवित्र बन सकता हूँ। मेरा काम सिर्फ इतना ही है कि मैं उसे मुझ पर सम्पूर्ण अधिकार दूं और मुझ में उसे गहराई से कार्य करने दूँ और उसे कहूँ, ‘प्रभु मेरे हाथ आपकी सेवा में और मेरे पाँव आपके काम के लिये हमेशा तैयार है। मेरे सभी अंग मनुष्यों की परवा किये बिना आपके आधीन होंगे।’ हमें उसके अधिकार के नीचे आना पड़ेगा जिससे कि पवित्र आत्मा हमें सम्पूर्ण रीति से वश में ले, क्योंकि हम खुद उसे ले नहीं सकते।
साधु-सन्यासी बन कर किसी दूर एकांत जगह में, एकाकी जीवन बिताने से मनुष्य पवित्र बन नहीं सकता।
बहुतेरे लोग अधिकार के लिये पवित्र आत्मा चाहते हैं,कि उनकी प्रसंशा ज्यादा होगी। लोग कहेंगे, ‘देखो, कैसा अद्भुत व्यक्ति, कैसा अच्छा मसीही। जब-जब वह प्रार्थना करता है, तब-तब कुछ होता है।’ लोग अधिकार, चिन्हों, आश्चर्य कार्यो और दूसरी कई बातों को खोजते हैं। परन्तु यह परमेश्वर को नहीं खोजते। पर परमेश्वर की पहेली मांग पवित्रता है और जैसा परमेश्वर पवित्र है वैसा पवित्र होने की भावना वो हमसे चाहता है, कि जैसे मैं पवित्र हूं, तुम भी पवित्र बनो।
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर
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