रोज़ की रोटी💐माँ बाप की ख़िदमत , एक सोच है।

PRAISE THE LORD

🙏Good Morning 🙏

          रोज़ की रोटी💐

माँ बाप की ख़िदमत , एक सोच है।
कुछ काम मज़बूरी में किये जाते हैं , और कुछ दिल की आवाज़ पर अंजाम दिए जाते हैं। २००७ में एक क़ानून बनाया गया , जिसमे कहा गया है , की बच्चे माँ बाप के देखभाल करने के लिए बाध्य हैं।अहम् सवाल यह है , इस कानून की ज़रूरत क्यों आन पड़ी? माँ बाप यदि कानून का सहर लेते हैं , तो मजबूरन बच्चों को माँ बाप की देखभाल करनी होगी , उन्हें ख़र्च के लिए पैसे देने होंगे। मज़बूरी की बुनियाद पर बनाए रिश्ते , सरासर झूठे होते हैं। माँ बाप की ख़िदमत के लिए , क़ानून की नहीं , सोच की ज़रूरत है| मज़बूरी और मुहब्बत में , ज़मीन आसमान का फ़र्क है| १ समुएल २२.३ में लिखा है --- दाऊद ने मोआब के बादशाह से कहा , मेरे माँ बाप को ज़रा यहीं आकर अपने यहां रहने दे , जबतक मुझे मालूम हो के ख़ुदा मेरे लिए क्या करेगा? दाऊद ख़ुद मुसीबत में था , और शाऊल के खौफ़ से भागा फिर रहा था।मगर अब भी वो , अपने माँ बाप के बारे में सोच रहा था। उसे अपने से ज्यादा , अपने माँ बाप की फ़िक्र थी। येशू सलीब पर बेइंतहा दर्द से होकर गुज़र रहा था , मगर तब भी वो अपनी जिस्मानी माँ के बारे में सोच रहा था। सोच , माँ बाप को बोझ नहीं बनने देता।

Amen 🙏
Hv a blessed day 🙌✝️

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