ओशो- सारी ऊर्जा विचारों में मत बर्बाद करो मानसिक ऊर्जा का सदुपयोग कैसे करें OSHO- Do not waste all your energy in thoughts, how to use mental energy properly (Remedy of Overthinking, Depression,Mental disorder, Insomnia,Sleeplessness) Osho about true Love, Kabir

 

मानसिक ऊर्जा का सदुपयोग कैसे करें [OSHO]

तुम्हारे सिर मेंसारे विचारों कासंग्रह है I तुमसोचते ही रहतेहो संगत असंगत,अनर्गल विचारों की भीड़तुम्हारे मन मेंचलती ही रहतीहैI इस विचारोंकी अतिशय भीड़के कारण तुम्हारीसारी ऊर्जा सारीशक्ति खो जातीहै I  कुछबचता नहीं मस्तिष्कशोषक हो गयाहै, चूस लेताहै ह्रदयके पास तकरस की धारपहुंची नहीं पाती I तुम्हारी सारी ऊर्जातुम्हारे विचारों में नष्टहुई जा रहीहै I तुम्हारे विचार99% विक्षिप्त हैं,  उनकाकोई भी मूल्यनहीं, तुम नाविचारों तो कुछहर्जा ना होजाए  लेकिनतुम होश मेंही नहीं हो Iकभी तुमने बैठकरघड़ी को देखाकि तुम क्यासोचते रहते हो?कैसा कचरा तुम्हारेमन में चलतारहता है? इसकचरे को चलाकर क्या होगा?दिन चलता हैरात चलता हैसोने में, जागनेमें, सपने मेंविचार में कचराघूम रहा हैऔर ध्यान रखनाकि छोटा साभी विचार चलरहा है तोतुम्हारी शक्ति को नष्टकर रहा है Iवैज्ञानिक इस नतीजेपर पहुंचे हैंकि अगर तुम1 घंटे कुदाली लेकर खेतमें गड्ढा खोदोजितनी शक्ति समाप्तहोती है, 15 मिनटविचार करने मेंउतनी ही शक्तिसमाप्त होती हैI यानी मन केश्रम में शरीरके श्रम सेचौगुनी शक्ति समाप्त होतीहै I शरीर काश्रम तो कमहो गया हैआदमी का, मनका श्रम बढ़गया है सिर्फशोषक हो गयाहै, किसी औरतरफ शक्ति कोजाने ही नहींदेता सारी शक्तिको खुद हीपी लेता हैइसलिए आक्रमक नहींहै वह प्रतीक्षाकरता है औरप्रतीक्षा करने कीवजह से हीवंचित है I जबतक तुम सिरको गिरादोगे विचार को गिरा दोगेतब तक तुम्हारेह्रदय में मरुस्थलरहेगा, जल केस्रोत वहां तकना पहुंच पाएंगेऔर वहां पड़ाहै बीज प्रेमका जल स्त्रोतवहां तक पहुंचेतो ही प्रेमअंकुरित होगा I

कहते हैंकबीर प्रेम बाड़ी उपजे प्रेम हाट बिकायराजा प्रजा जेरूशीश  देले जाए I शीशदेने को ठीकसे समझ लेना,  विचारऔर अहंकार दोछूट जाएं तोतुम्हारा सिर गिरगया अब प्रेमकी संभावना खुलीअब प्रेम खिलेगा I अबतुमने प्रेम केबीच से बाधाहटा दी I तुम्हारीखोपड़ी के अतिरिक्तऔर कोई बाधानहीं है, वहीपत्थर की चट्टानकी तरह बीचमें पड़ी है Iपोथी पढ़ पढ़जग मुआ पंडितहुआ कोयढाई आखर प्रेमके पढ़े सोपंडित होय कहतेहैं कबीर पोथीपढ़ पढ़ केअनेक लोग मरजाते हैं जीवनभर पढ़ते रहतेहैं और मरजाते हैं फिरभी ज्ञान कोउपलब्ध नहीं होतेक्योंकि ज्ञान का कोईसंबंध विचार सेनहीं है विचारको तो उपलब्धहो जाते हैंबहुत विचार कोउपलब्ध हो जातेहैं I

जितना तुम पढ़ोगे,सुनोगे, संग्रह करोगे स्मृतिभारी होती जाएगी I तुम बहुत कुछजान लोगे बिनाजाने बिना पहचानेकेवल शब्दों केकारण तुम्हें यहभ्रांति हो जाएगीकि मैं बहुतज्ञानी हो गयाहूं I

पोथी पढ़पढ़ जग मुआपंडित हुआ   कोयढाई आखर प्रेमके पढ़े सोपंडित होय I कबीरके लिए पांडित्यकी परिभाषा ज्ञानकी परिभाषा हैजिसने प्रेम केढाई अक्षर पढ़लिए और प्रेमके ढाई अक्षरपढ़ने का कोईउपाय पोथी मेंनहीं है I जीवनकी पोथी मेंही पढ़ना पड़ेगा,जीवन के विद्यालयमें ही आनापड़ेगा, जीवन केप्रांगण में हीवे ढाई अक्षरपढ़े जा सकतेहैं I

ढाई अक्षरहिंदी में जोशब्द है प्रेमउसमें ढाई अक्षरहैं I लेकिन कबीरका मतलब गहराहै जब भीकोई व्यक्ति किसीके प्रेम मेंगिरता है तोवहां ढाई अक्षरप्रेम के पूरेहोते हैं I एकतो प्रेम करनेवाला, एक जिसकोप्रेम करता हैदो, और दोनोंके बीच मेंकुछ है अज्ञातवह ढाई I औरउसे क्यों कबीरआधा कहते हैं?ढाई क्यों? तीनकह सकते हैं I

आधा कहनेका कारण हैऔर बड़ा मधुरकारण है, कबीरकहते हैं प्रेमकभी पूरा नहींहोता I कितना ही पूराहोता जाए तुमकभी तृप्त नहींहोते I कभी ऐसानहीं लगता किबस गईपूर्ति, संतुष्ट हो गए Iप्रेम कितना हीहोता जाए अधूराही बना रहताहै I वह परमात्माजैसा है कितनाही विकसित होताजाए, पूर्ण सेपूर्णतर होता जाताहै फिर भीविकास जारी हैजैसे प्रेम काजो अधूरापन हैवह उसकी शाश्वतताहै I इसे ध्यानरखना कि जोभी चीज पूरीहो जाती वहमर जाती है Iपूर्णता मृत्यु है, क्योंकिफिर बचा नहींकुछ करने को,होने को कुछबचा नहीं I आगेकोई गति नारही I जो भीचीज पूर्ण होगई वह मरगई मर हीजाएगी क्योंकि फिरक्या होगा? सिर्फवही जी सकताहै शाश्वत, जोशाश्वत रूप सेअपूर्ण है, अधूराहै, आधा हैऔर तुम कितनाही भरो, वहआधा रहेगा क्योंकिआधा होना उसकास्वभाव है I तुमकितने ही तृप्तहोते जाओ, फिरभी तुम पाओगेहर तृप्ति औरअतृप्त कर जातीहै I जितना तुमपीते हो उतनीही तुम्हारी प्यासबढ़ती चली जातीहै I यह ऐसाजल नहीं हैजो तुम पीलो और तृप्तहो जाओ यहऐसा जल हैजो तुम्हारी प्यासको और जलाएगा इसलिएप्रेमी कभी तृप्तनहीं होता, औरइसलिए उसके आनंदका कोई अंतनहीं क्योंकि आनंदवही अंत होजाता है जहांचीजें पूरी होजाती है I

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