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आज हम सबको विश्वास में मजबूत होना है। क्योंकि जिस व्यक्ति के पास विश्वास की चाबी होती है। उस चाबी से हर एक दरवाजा हर एक द्वार खुल जाता है चाहे कितना भी बड़ा ताला क्यों ना हो। विश्वास दिखना चाहिए, हमारी बातों में, हमारे चाल चलन में। और हमारे हर एक काम में, जो हम पृथ्वी पर करते हैं। हमको निडर बनना होगा। और परिस्थिति का सामना करना होगा।क्या आप परमेश्वर के काम को करना चाहते हैं। क्या परमेश्वर की महिमा का कारण बनना चाहते हैं। *अगर खुदा का काम करना है. तो आपको सामना करना पड़ेगा, हर एक परिस्थिति का. और निडर बनना होगा।* विश्वास ही से हम जय प्राप्त कर सकते हैं। विश्वास ही वह चाबी है जिससे हर ताला खुल सकता है।*और देखो, कई लोग एक लकवे के मारे हुए को खाट पर रखकर उसके पास लाए; यीशु ने उन का विश्वास देखकर, उस लकवे के मारे हुए से कहा; हे पुत्र, ढाढ़स बान्ध; तेरे पाप क्षमा हुए। (मत्ती 9:2)*विश्वास वो चाबी है जो सब ताले खोल देती है। यहां उस मनुष्य को जो लेकर आए थे, उनको विश्वास था। सिर्फ उस परमपिता परमेश्वर पर विश्वास कीजिए। कि वह आपके लिए सब कुछ कर सकता है। और विश्वास की चाबी आज आपके हर एक दरवाजे को, हर एक ताले को खोल देगी।

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आज हम सबको विश्वास में मजबूत होना है। क्योंकि जिस व्यक्ति के पास विश्वास की चाबी होती है। उस चाबी से हर एक दरवाजा हर एक द्वार खुल जाता है  चाहे कितना भी बड़ा ताला क्यों ना हो। विश्वास दिखना चाहिए, हमारी बातों में, हमारे चाल चलन में। और हमारे हर एक काम में, जो हम पृथ्वी पर करते हैं। हमको निडर बनना होगा। और परिस्थिति का सामना करना होगा। क्या आप परमेश्वर के काम को करना चाहते हैं। क्या परमेश्वर की महिमा का कारण बनना चाहते हैं। *अगर खुदा का काम करना है. तो आपको सामना करना पड़ेगा, हर एक परिस्थिति का. और निडर बनना होगा।* विश्वास ही से हम जय प्राप्त कर सकते हैं। विश्वास ही वह चाबी है जिससे हर ताला खुल सकता है। *और देखो, कई लोग एक लकवे के मारे हुए को खाट पर रखकर उसके पास लाए; यीशु ने उन का विश्वास देखकर, उस लकवे के मारे हुए से कहा; हे पुत्र, ढाढ़स बान्ध; तेरे पाप क्षमा हुए। (मत्ती 9:2)* विश्वास वो चाबी है जो सब ताले खोल देती है। यहां उस मनुष्य को जो लेकर आए थे, उनको विश्वास था। *आज के समय में लोगों के पास झूठ का लकवा, नफरत का लकवा, लालच का लकवा, घमंड का लकवा भी हो सकता है। उसको...

हमें, हमारे हृदयों को प्रभु के सामने खोलना चाहिये और हमारी निर्बलताओं, मुश्किलों और जरूरतों को उसे बताना चाहिये, और साथ ही साथ प्रभु को अवसर देना चाहिये कि वह हमारे साथ बात करें और किस कारणवश हम निर्बल है वह हमें बताये। प्रभु हमको बतायेगा कि किस रीति से सब कुछ ठीकठाक करना, किस रीति से बल प्राप्त करना और किस रीति हमारी आवश्यकतायें पूरी हों। उसके शब्द हमारे लिये बहुत ही बहुमूल्य और सच्चे बन जाते हैं। जो प्रभु यीशु के साथ संगति द्वारा हम अनुभव करते हैं। उसके बाद व्यक्तिगत रीति से और पारिवारिक रीति से सच्ची वृद्धि आती है।

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हमारे प्रतिदिन के बल के लिये जो वचन परमेश्वर देता है उसका यह वचन ही हमारा आत्मिक भोजन है। परमेश्वर अपना जीवित वचन रोज व रोज देता है। संगति द्वारा भोजन और भी स्वादिष्ट बन जाता है। साथ मिलकर भोजन लेने से हमारी संगति भी आनन्ददायक बन जाती है। जब हम अकेले भोजन करते हैं तब इतना आनन्द प्राप्त नहीं होता। सर्वप्रथम प्रभु यीशु के साथ और उसके बाद एक दूसरे साथ संगति के लिये इकठ्ठा होना चाहिये।  हमें भी प्रभु यीशु के लिये ऐसा ही प्रेम होना चाहिये और जैसे मित्र मित्र के साथ वैसे ही उसके साथ भी बात करने की इच्छा होनी चाहिये। यह सच्ची संगति है।   हमें, हमारे हृदयों को प्रभु के सामने खोलना चाहिये और हमारी निर्बलताओं, मुश्किलों और जरूरतों को उसे बताना चाहिये, और साथ ही साथ प्रभु को अवसर देना चाहिये कि वह हमारे साथ बात करें और किस कारणवश हम निर्बल है वह हमें बताये। प्रभु हमको बतायेगा कि किस रीति से सब कुछ ठीकठाक करना, किस रीति से बल प्राप्त करना और किस रीति हमारी आवश्यकतायें पूरी हों। उसके शब्द हमारे लिये बहुत ही बहुमूल्य और सच्चे बन जाते हैं।  जो प्रभु यीशु के साथ संगति द्वारा ...

जब हम अपने दुखों में फसे हुए यीशु मसीह के पास आते हैं वो हमारे दुखों से हमें छुटकारा भी दिला देता है हमारा जीवन भी सही रास्ते पर आने लगता है ।मगर उसी के साथ साथ हमारे आसपास एक काम और हो रहा होता है जिसकी ओर हमारा ध्यान बहुत देर से जाता है वो काम है हमारे अपने जिन्हें हम कहते हैं वो हमसे दूर होना शुरू हो जाते है । शुरू में यह कठिन लगता है पर बाद में इसकी आदत हो जाती हैं क्योंकि लिखा है तुझे दूध पिलाने वाली माॅ छोड देगी पर मैं न तुझे छोड़ूंगा न ही त्यागूंगा ; इसलिए चिन्ता न करें आपके अपने आपके पास नहीं है पर यीशु मसीह तो है वहीं हमारा उद्धार करनेवाला परमेश्वर है ।

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जब हम अपने दुखों में फसे हुए यीशु मसीह के पास आते हैं वो हमारे दुखों से हमें छुटकारा भी दिला देता है हमारा जीवन भी सही रास्ते पर आने लगता है । मगर उसी के साथ साथ हमारे आसपास एक काम और हो रहा होता है जिसकी ओर हमारा ध्यान बहुत देर से जाता है वो काम है हमारे अपने जिन्हें हम कहते हैं वो हमसे दूर होना शुरू हो जाते है । हमारे दोस्त हमसे किनारा करने लगते है वजह हम बाइबिल के हिसाब से जीवन जीना शुरू करते और वो सब सांसारिक तरीक़े पर ही चलते होते हैं इस वजह से हमारे और उनके बीच एक दूरी आ जाती है । जो कुछ दिनों के बाद एक खाई का रुप ले लेती हैं जिसे पार करना उनकेे बस में नहीं होता और आप उस खाई के पार जा नहीं सकते इस वजह रिश्ते कड़वे होने लगते है । रिश्ते बोझ लगने लगते हैं पहले वाला प्यार समाप्त होने लगता है हम अपनों की नजर में पराये लगने लगते हैं सब आप को छोडना शुरू कर देते हैं तब आप को लगता हैं मैं तो अकेला खड़ा हूॅ मेरे अपने कहां गये ?  जो हर समय मेरे साथ थे वो सब पीछे छूट जाते और आप अपने को तन्हा पाते हैं इन सब कामों को परमेश्वर हमारे साथ होने भी देता है क्योंकि यह जरूरी भी है । ...

क्या आप जानते है कि वचन मनुष्य की तुलना गधे से करता है।💥 अय्यूब 11:12परन्तु मनुष्य छूछा और निर्बुद्धि होता है; क्योंकि मनुष्य जन्म ही से जंगली गदहे के बच्चे के समान होता है।दिलचस्प बात है कि मनुष्य दुसरे मनुष्य को गधा कहता है।लेकिन परमेशवर हर मनुष्य को गधा कहता है। क्यों? क्योंकि हरेक मनुष्य बोझ और परेशानियों का सामना करता है। वचन कहता है --- गधे को मेम्ना देकर आजाद किया जा सकता है।यह मेम्ना कौन है? वचन कहता है यीशु मसीह ही मेम्ना है यूहन्ना 1:29दूसरे दिन उस ने यीशु को अपनी ओर आते देखकर कहा, देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना है, जो जगत के पाप उठा ले जाता है।"💥 आज हम आनंदित और मगन हो सकते है कि परमेशवर ने हमारे छुटकारे के लिए यीशु मसीह को भेज दिया जो बलि किया गया मेम्ना है। जी हां उसके बलिदान के द्वारा हम छुड़ाए जाते है। 🌹क्या मनुष्य का जीवन गधे की तरह नही होता ? वह थका और बोझ से दबा है । ।यीशु ने कहा है सब थके और बोझ से दबे लोगो मेरे पास आओ ,मैं तुम्हे विश्राम दूंगा!! 💥 आइए उस मेम्ने के लिए धन्यवाद करें जो हम गदहों के छुटकारे के लिए परमेशवर ने हमें दिया है

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पुराने समय मे और यहाँ तक कि आज के समय मे भी गधे की चर्चा होती है।कठिन श्रम और बहुत ज्यादा मेहनत।आपने धोबी के गधे के बारे में सुना होगा,वह किनती मेहनत करता है!! गदहों का उपयोग शुरू से ही बोझा ढोने में किया जाता है।वह रात दिन मेहनत करता है,ईंटे ढोता है,मनुष्य की सवारी के काम आता है।गधा कठिन परिश्रम के शाप का शिकार है।गधा आम साहित्य और बोल चाल में उपहास और हँसी का भी पात्र है।अगर किसी को नीचा दिखाना हो, मंद बुद्धि का और मूर्ख बताना हो तो उसे गधा कहा जाता है। 💥 परमेशवर के वचन में गधे को भी इस शाप से छुड़ाने का प्रबंध है। क्या आप जानते है कि वचन मनुष्य की तुलना गधे से करता है। 💥 अय्यूब 11:12 परन्तु मनुष्य छूछा और निर्बुद्धि होता है; क्योंकि मनुष्य जन्म ही से जंगली गदहे के बच्चे के समान होता है। दिलचस्प बात है कि मनुष्य दुसरे मनुष्य को गधा कहता है।लेकिन परमेशवर हर मनुष्य को गधा कहता है। क्यों? क्योंकि हरेक मनुष्य बोझ और परेशानियों का सामना करता है। वचन कहता है --- गधे को मेम्ना देकर आजाद किया जा सकता है।यह मेम्ना कौन है? वचन कहता है यीशु मसीह ही मेम्ना है     यूहन्ना 1:...

समस्याओं और परेशानियों में ही, सब्र (धीरज ) (धैर्य )पैदा होता है| आप कितने धैर्यवान हैं, यह समस्याओं के दौरान ही पता चलता| जब समस्याओं के तूफ़ानों से आप घिर जाते हैं तब ही आपको पता चलेगा,कि आपमे सब्र करने और सहने की ताक़त है की नहीं| याकूब 1:3 में लिखा है ---इसको पूरे आनंद की बात समझो, यह जान कर कि, तुम्हारे ईमान के परखे जाने से, धीरज पैदा होता है| ख़ुदा के वायदों पर ईमान रखना है, मगर वायदों के पूरा होने तक, सब्र रखना उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है|

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समस्याओं और परेशानियों में ही, सब्र (धीरज ) (धैर्य )पैदा होता है| आप कितने धैर्यवान हैं, यह समस्याओं के दौरान ही पता चलता| जब समस्याओं के तूफ़ानों से आप घिर जाते हैं तब ही आपको पता चलेगा,कि आपमे सब्र करने और सहने की ताक़त है की नहीं| याकूब  1:3 में लिखा है ---इसको पूरे आनंद की बात समझो, यह जान कर कि, तुम्हारे ईमान के परखे जाने से, धीरज पैदा होता है| ख़ुदा के वायदों पर ईमान रखना है, मगर वायदों के पूरा होने तक, सब्र रखना उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है| परेशानियों के तूफानों में, सब्र आपके ईमान का लंगर है| जैसे सुबह अपने समय पर होती है, ठीक वैसे ही, ख़ुदा के वायदे अपने समय पर पूरे होते हैं| अपना ध्यान समय पर नहीं, वायदों के पूरा होने पर लगाए रखिये| आमीन प्रभु अपने वायदों का पक्का है रैव्ह. राजेश गिरधर..

विपत्ति के समय ज्यादातर लोग साहस छोड देते हैं | जबकि बाइबिल में परमेश्वर कहता है मत डर बस विश्वास कर एक बार नही बहुत बार परमेश्वर ने कहा मत डर बस विश्वास कर परमेश्वर सब कुछ ठीक करेगा ।फिर भी लोग इस बात पर यकीन नहीं करते परमेश्वर ने जब कहा मत डर विश्वास रख तो हमें उस कठिन परिस्थितियों में भी अपने आप को अकेला नहीं समझना चाहिए ।यीशु मसीह का यह वादा है वो न तो हमें कभी छोडेगा और न कभी त्यागेगा जन्म देनेवाली मां छोड़ देगी मगर यीशु मसीह हमें कभी नहीं छोडेगा उसका यह वादा हमें हमेशा याद रखना होगा ।जब भी भय लगे तब हमें इन वचनों को दोहराना है वो न हमें छोड़ेगा न त्यागेगा उसी समय हमें मजबूती का अहसास होने लगेगा

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विपत्ति के समय ज्यादातर लोग साहस छोड देते हैं और घबरा कर भर में आ जाते हैं और उस भर को छुपाने की कोशिश करते हैं जिसके बारे में हम सिर्फ खुद ही सोचते और बहुत बार घबरा कर साहस छोड देते हैं । ऐसा बहुत बार उन लोगों के साथ हो जाता है जो अपने को अकेला समझते हैं जिन्हें लगता है उनका कोई नहीं वो लोग भय के समय कुछ भी उलटी सीधी हरकत करने से भी नही डरते । जबकि बाइबिल में परमेश्वर कहता है मत डर बस विश्वास कर एक बार नही बहुत बार परमेश्वर ने कहा मत डर बस विश्वास कर परमेश्वर सब कुछ ठीक करेगा । फिर भी लोग इस बात पर यकीन नहीं करते परमेश्वर ने जब कहा मत डर विश्वास रख तो हमें उस कठिन परिस्थितियों में भी अपने आप को अकेला नहीं समझना चाहिए । यीशु मसीह का यह वादा है वो न तो हमें कभी छोडेगा और न कभी त्यागेगा जन्म देनेवाली मां छोड़ देगी मगर यीशु मसीह हमें कभी नहीं छोडेगा उसका यह वादा हमें हमेशा याद रखना होगा । जब भी भय लगे तब हमें इन वचनों को दोहराना है वो न हमें छोड़ेगा न त्यागेगा उसी समय हमें मजबूती का अहसास होने लगेगा  बाईबल हमें ऐसा बताती है कि डरपोक लोग परमेश्वर के स्वर्ग राज्य के वारिस न...

"परिस्थितियां कभी समस्या नहीं बनती,समस्या इस लिए बनती है, क्योंकि हमें उन परिस्थितियों से लड़ना नहीं आता.. “इसलिए तुम चिन्ता करके यह न कहना, कि हम क्या खाएँगे, या क्या पीएँगे, या क्या पहनेंगे?क्योंकि अन्यजाति इन सब वस्तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्तुएँ चाहिए।इसलिए पहले तुम परमेश्‍वर के राज्य और धार्मिकता की खोज करो तो ये सब वस्तुएँ तुम्हें मिल जाएँगी। (लूका 12:31)अतः कल के लिये चिन्ता न करो, क्योंकि कल का दिन अपनी चिन्ता आप कर लेगा; आज के लिये आज ही का दुःख बहुत है।

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*एक घर के पास काफी दिन से  एक बड़ी इमारत का काम चल रहा था। वहां रोज मजदूरों के छोटे-छोटे बच्चे एक दूसरे की शर्ट पकडकर रेल-रेल का खेल खेलते थे।*  *रोज कोई बच्चा इंजिन बनता और बाकी बच्चे डिब्बे बनते थे...* *इंजिन और डिब्बे वाले बच्चे रोज बदल  जाते,पर...* *केवल चङ्ङी पहना एक छोटा बच्चा हाथ में रखा कपड़ा घुमाते हुए रोज गार्ड बनता था।* *वहां का ठेकेदार बच्चों का यह खेल रोज देखता था* ... *उन बच्चों को खेलते हुए रोज़ देखने वाले ठेकेदार ने  कौतुहल से गार्ड बनने वाले बच्चे को पास बुलाकर पूछा....* *"बच्चे, तुम रोज़ गार्ड बनते हो। तुम्हें कभी इंजन, कभी डिब्बा बनने की इच्छा नहीं होती?"* *इस पर वो बच्चा बोला...* *"बाबूजी, मेरे पास पहनने के लिए कोई शर्ट नहीं है। तो मेरे पीछे वाले बच्चे मुझे कैसे पकड़ेंगे... और मेरे पीछे कौन खड़ा रहेगा....?* *इसीलिए मैं रोज गार्ड बनकर ही खेल में हिस्सा लेता हूँ।*  *"ये बोलते समय मुझे उसकी आँखों में पानी दिखाई दिया।*  *आज वो बच्चा उस ठेकेदार को जीवन का एक बड़ा पाठ पढ़ा गया...* *अपना जीवन कभी भी परिपूर्ण नहीं होता। उसमें कोई न क...