"परिस्थितियां कभी समस्या नहीं बनती,समस्या इस लिए बनती है, क्योंकि हमें उन परिस्थितियों से लड़ना नहीं आता.. “इसलिए तुम चिन्ता करके यह न कहना, कि हम क्या खाएँगे, या क्या पीएँगे, या क्या पहनेंगे?क्योंकि अन्यजाति इन सब वस्तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्तुएँ चाहिए।इसलिए पहले तुम परमेश्वर के राज्य और धार्मिकता की खोज करो तो ये सब वस्तुएँ तुम्हें मिल जाएँगी। (लूका 12:31)अतः कल के लिये चिन्ता न करो, क्योंकि कल का दिन अपनी चिन्ता आप कर लेगा; आज के लिये आज ही का दुःख बहुत है।
*एक घर के पास काफी दिन से एक बड़ी इमारत का काम चल रहा था। वहां रोज मजदूरों के छोटे-छोटे बच्चे एक दूसरे की शर्ट पकडकर रेल-रेल का खेल खेलते थे।* *रोज कोई बच्चा इंजिन बनता और बाकी बच्चे डिब्बे बनते थे...* *इंजिन और डिब्बे वाले बच्चे रोज बदल जाते,पर...* *केवल चङ्ङी पहना एक छोटा बच्चा हाथ में रखा कपड़ा घुमाते हुए रोज गार्ड बनता था।* *वहां का ठेकेदार बच्चों का यह खेल रोज देखता था* ... *उन बच्चों को खेलते हुए रोज़ देखने वाले ठेकेदार ने कौतुहल से गार्ड बनने वाले बच्चे को पास बुलाकर पूछा....* *"बच्चे, तुम रोज़ गार्ड बनते हो। तुम्हें कभी इंजन, कभी डिब्बा बनने की इच्छा नहीं होती?"* *इस पर वो बच्चा बोला...* *"बाबूजी, मेरे पास पहनने के लिए कोई शर्ट नहीं है। तो मेरे पीछे वाले बच्चे मुझे कैसे पकड़ेंगे... और मेरे पीछे कौन खड़ा रहेगा....?* *इसीलिए मैं रोज गार्ड बनकर ही खेल में हिस्सा लेता हूँ।* *"ये बोलते समय मुझे उसकी आँखों में पानी दिखाई दिया।* *आज वो बच्चा उस ठेकेदार को जीवन का एक बड़ा पाठ पढ़ा गया...* *अपना जीवन कभी भी परिपूर्ण नहीं होता। उसमें कोई न क...